ब्लॉगः ममता को मोदी का शुक्रगुजार होना चाहिए कि इस जीत ने उनका कद बढ़ा दिया

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देश के पांच अहिंदीभाषी राज्यों के चुनाव-परिणाम के सबक क्या-क्या हैं? पहला सबक तो यही है कि भारत विविधतामय लोकतंत्र है। अब यहां ‘एक पार्टी और एक नेता का राज’ नहीं चल सकता। बीजेपी असम में जरूर जीती है, लेकिन तीन बड़े राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में हार गई है। पुडुचेरी में वह जीते हुए गठबंधन की सदस्य भर है। पश्चिम बंगाल में उसका 200 सीटों का दावा हवाई किला भर बनकर रह गया है। केरल में उसने मेट्रोमैन श्रीधरन को भी दांव पर लगा दिया, लेकिन उसकी पहले जो एक सीट थी, वह भी वह हार गई। दूसरे शब्दों में अब केंद्र की बीजेपी सरकार को उत्तर और दक्षिण की सशक्त विपक्षी सरकारों के साथ ताल-मेल की राजनीति चलानी पड़ेगी। अपनी दादागीरी चलाना मुश्किल होगा।