‘योगी जी अयोध्या जाते तो दुख होता, वो यहां आए थे तो कुछ नहीं थे, गोरखपुर ने उन्हें सबकुछ बनाया’

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गोरखपुर
गोरखनाथ मंदिर में लगे खिचड़ी मेले के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। गेट पर एक कोविड हेल्प डेस्क बनी है, जहां पुलिस के लोग लोगों को मास्क लगाकर ही मंदिर में घुसने की हिदायत दे रहे हैं। मंदिर के गेट पर गोरक्षनाथ मंदिर के नाम के साथ यूपी पुलिस का एक बैरिकेड है। हम जिस परिसर में खड़े हैं, वहां पुलिस के साथ मैजिस्ट्रेट और कुछ अन्य अधिकारियों की चहलकदमी है। कारण ये है कि इस परिसर में फिलहाल यूपी के सीएम मौजूद हैं। कुछ देर पहले दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित बीजेपी के राष्ट्रीय मुख्यालय से एक सूची जारी कर योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर की शहर सीट से दावेदार बनाया गया है।

ये वृतांत उस वक्त का है, जब गोरखपुर में सीएम योगी के शहर की सीट से लड़ने की घोषणा की गई और गोरखनाथ मंदिर के बाहर सायरन और लग्जरी गाड़ियों की भीड़ जुटने लगी। गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर ही नहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति की वो धुरी रही है, जिसके मुखिया योगी आदित्यनाथ हैं। गोरखपुर में कुछ देर पहले ही सीएम योगी को बधाई देने पहुंचे बीजेपी के एक स्थानीय नेता कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ अगर पूरे भारत में किसी सीट से चुनाव लड़ जाएं तो उन्हें इतनी ही खुशी होती जितनी उनके गोरखपुर लड़ने से है।

कुछ नहीं से सबकुछ बनते गोरखपुर वालों ने देखा
जिले के मोहद्दीपुर इलाके से आने वाले प्रकाश नारायण कहते हैं कि गोरखपुर वालों का योगी पर हक अधिक है। प्रकाश कहते हैं कि जब योगी आदित्यनाथ यहां पर आए तो वह एक सामान्य संत थे, जिन्हें महंत अवैद्यनाथ के शिष्य के रूप में काम करना था। हिंदू जनजागरण के लिए जब उन्होंने काम करना शुरू किया तो गोरखपुर ने ही उन्हें इसके लिए स्थानीय समर्थन दिया। बाद में सांसद बनने पर उनकी फायरब्रांड वाली छवि भी गोरखपुर से ही बनी। गोरखपुर योगी के कुछ नहीं से सब कुछ बनने तक का वाहक है। वो सांसद से सीएम तक सब यहीं से बने। ऐसे में वह अगर अयोध्या से लड़ाए जाते तो गोरखपुर वालों को दुख तो होता।

पूर्वांचल पर असर होगा
गोरखपुर के गोलघर में अपनी एक दुकान चलाने वाले सुरेश श्रीवास्तव कहते हैं कि योगी के गोरखपुर से चुनाव लड़ने पर शहर का और विकास होगा। वो रामगढ़ताल के सौंदर्यीकरण और शहर में बन रहे तमाम रास्तों की बात कहकर योगी को इसका श्रेय देते हैं। वो ये भी कहते हैं कि निर्माण कार्य इतना हो रहा है कि लोगों को इससे थोड़ी दिक्कत जरूर हो रही है। लेकिन अगर किसी कपड़े को सिलना है, तो उसे काटना होगा। शहर में कुछ बन रहा है तो कंस्ट्रक्शन से थोड़ी परेशानी होगी। सुरेश कहते हैं कि योगी अयोध्या से चुनाव लड़ते तो अवध मैनेज होता, यहां से लड़ेंगेतो पूर्वांचल का क्षेत्र व्यापक पैमाने पर बीजेपी के साथ आ जाएगा।

मथुरा, अयोध्या के बाद गोरखपुर का नाम
दरअसल सीएम योगी को पहले अयोध्या या मथुरा की सीट से लड़ाने पर पूरा मंथन किया जा रहा था। अयोध्या से योगी को लड़ाने की मंशा के पीछे व्यापक संदेश था कि इससे राम राज्य का संदेश प्रदेश में जाएगा। हालांकि गोरखपुर और इसके आसपास के जिलों में सीटों के गणित को देखते हुए यही फैसला हुआ कि योगी को गोरखपुर शहरी सीट से चुनाव लड़ाया जाए। योगी जिस गोरक्षपीठ के शिष्य से लेकर महंत तक का सफर तय कर चुके हैं वह भी इसी विधानसभा सीट पर स्थित है। योगी एक लंबे समय से इस सीट पर चुनाव का प्रबंधन देखते रहे हैं।

सीट का पूरा समीकरण
गोरखपुर शहरी, गोरखपुर जिले की सीट है। जिले की कुल 9 विधानसभा सीटों में से एक गोरखपुर शहरी विधानसभा सीट पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। अतीत पर गौर करें तो इस सीट पर हुए पिछले तीन चुनाव से बीजेपी का ही कब्जा रहा है। फिलहाल इस सीट से बीजेपी के डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल विधायक है। साल 2012 में उन्होंने सपा प्रत्याशी राजकुमारी देवी को हराया था। इसके पहले 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के भानु प्रकाश मिश्रा को मात दी थी।