बिजी शेड्यूल, मीटिंग्‍स की भरमार… आखिर क्‍या है पीएम मोदी के न थकने का राज?

0
8

नई दिल्ली
विदेश यात्राओं के दौरान का कार्यक्रम अमूमन व्यस्त रहता है। इसे देखते हुए अक्सर उनके प्रशंसकों में यह जानने की इच्‍छा होती है कि इसके लिए प्रधानमंत्री इतनी ऊर्जा कहां से लाते हैं। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री अपना कार्यक्रम इतना व्यस्त रखते हैं कि थकान उन्हें महसूस भी हो तो वह हावी न हो सके।

प्रधानमंत्री का चार दिवसीय अमेरिकी दौरा भी ऐसा ही रहा। वह रविवार को स्वदेश लौटे। सूत्रों ने कहा कि बिना थके लंबी यात्राएं करना उनके लिए कोई नया नहीं है। देखने वाली बात यह है कि रविवार को ही पीएम स्‍वदेश लौटे और रात करीब 8.45 बजे नई दिल्ली में नए संसद भवन के निर्माण स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने साइट पर लगभग एक घंटा बिताया और नए संसद भवन के निर्माण की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।

एक सूत्र ने कहा, ‘जब वह 1990 के दशक में अमेरिका जाया करते थे, उस वक्त एक एयरलाइन भारी छूट के साथ मासिक यात्रा का पास देती थी। इसका ज्‍यादा से ज्‍यादा उपयोग करते हुए मोदी हमेशा रात को यात्रा करते थे ताकि होटलों पर अधिक खर्च न कर वह अधिक से अधिक स्थानों का दौरा कर सकें। उनकी रात अक्सर यात्रा में या हवाई अड्डे पर बीतती थी।’

सूत्र ने बताया कि जैसे ही प्रधानमंत्री विमान पर सवार होते हैं, वह जिस देश का भ्रमण कर रहे होते हैं, उसके समयानुसार खुद को ढालने के लिए सोने का समय चुनते हैं। उन्होंने बताया कि इसका मतलब यह हुआ कि जब वह विमान पर सवार हुए उस समय यदि भारत में रात है और उन्हें जहां जाना है वहां दिन है तो वह नहीं भी सो सकते हैं।

सूत्र ने बताया कि लौटते समय भी प्रधानमंत्री यही करते हैं। भारतीय समय को ध्यान में रखते हुए अपने सोने का समय तय करते हैं ताकि वह सुनिश्चित कर सकें कि उन्हें ताजगी महसूस हो और विमान से उतरने के बाद कहीं भी जा सकें। ऐसी यात्राओं में मोदी पानी भी बहुत पीते हैं।

अमेरिका की यात्रा के दौरान मोदी ने वहां 65 घंटे बिताए और इस दौरान 20 बैठकों में हिस्सा लिया। अमेरिका आने और जाने के क्रम में भी उन्होंने चार घंटे विमान में अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।