कैसे की जाए आर्मी, नेवी, एयरफोर्स की जॉइंट ट्रेनिंग? इस बात पर है पूरा जोर

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नई दिल्ली
इंडियन आर्म्ड फोर्सेस में सबसे बड़े बदलाव, थिएटर कमांड बनाने की प्रक्रिया के साथ ही जॉइंट ट्रेनिंग पर भी काम किया जा रहा है। थिएटर कमांड में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स एक साथ होंगे तो इनकी ट्रेनिंग भी एक साथ करने की जरूरत होगी। जॉइंट ट्रेनिंग कैसे और किस तरह होगी इसके लिए स्टडी की गई है।

इन अधिकारियों को भी दी जाए विदेशी भाषा की ट्रेनिंग
सूत्रों के मुताबिक स्टडी के लिए एक टीम बनाई गई थी जिसमें आर्मी के ट्रेनिंग कमांड के टॉप अधिकारी और एयरफोर्स ट्रेनिंग कमांड और सदर्न नेवल कमांड के अधिकारी शामिल थे। स्टडी रिपोर्ट चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी को दी गई है। सूत्रों के मुताबिक स्टडी रिपोर्ट में विदेशी भाषा की ट्रेनिंग पर खास ध्यान देने को कहा गया है। इसमें कहा गया है कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के सिर्फ ऑफिसर्स की ही नहीं बल्कि जेओसी, एनओसी और नेवी-एयरफोर्स में इनके बराबर के रैंक के लोगों की भी जॉइन ट्रेनिंग की जाए।

तीन साल की एनडीए ट्रेनिंग
अभी तीनों सर्विस के कैडेट की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग 3 साल एनडीए में होती है और फिर एक साल सर्विस स्पेसिफिक ट्रेनिंग होती है। स्टडी रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि एजुकेशन और ट्रेनिंग को वेटेज देने में बैलेंस बनाया जाए। यह भी सुझाव है कि जॉइंट ऑपरेशन और वॉर फाइटिंग के लिए अलग स्कूल हो और नए जॉइंट ट्रेनिंग सर्विसेज इंस्टिट्यूशन बनें।

थिएटर कमांड में अभी वक्त
अभी थिएटर कमांड बनाने के लिए चार कमांडर इन चीफ (सीएनसी) नॉमिनेट करने की प्रक्रिया चल रही है। जो एक साल के भीतर थिएटर कमांड के लिए सांगठनिक ढांचा तैयार करने का काम करेंगे और एक साल के वक्त में रिपोर्ट देंगे। इसके बाद सरकार के अप्रूवल से थिएटर कमांडर नियुक्त किए जाएंगे। वह 2-3 साल के भीतर थिएटर कमांड तैयार करेंगे। कुल मिलाकर थिएटर कमांड के हकीकत का रूप लेने करीब 3-4 साल लगेंगे।