दुखद है, 6 महीने पहले दी रिपोर्ट पर किसान आंदोलन का नहीं हुआ समाधान: SC पैनल सदस्य

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नई दिल्ली
कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमिटी के सदस्य ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर गुहार लगाई है कि कमिटी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। कमिटी ने 19 मार्च को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी और उससे पहले तमाम हित धारकों और किसानों से बात की थी। किसानों की चिंता को भी देखा गया है और उन्हें भरोसा है कि रिपोर्ट में की गई सिफारिशों से किसानों का आंदोलन खत्म करने का रास्ता निकलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए चार सदस्यीय कमिटी के गठन का फैसला किया था। इनमें से एक सदस्य अनिल धनावट (प्रेसिडेंट शेतकेरी संगठन महाराष्ट्र) ने चीफ जस्टिस को लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानून को लेकर बनाई गई कमिटी का वह एक सदस्य हैं। कमिटी को दो महीने में रिपोर्ट देनो को कहा गया था। कमिटी ने तमाम किसानों और हित धारकों से उनकी राय ली और बातचीत की और 19 मार्च को रिपोर्ट पेश कर दी।

रिपोर्ट में कमिटी ने तमाम हित धारकों के सुझाव और ओपिनियन रखा है। किसानों की चिंताओं को भी देखा गया है। कमिटी को भरोसा है कि रिपोर्ट में की गई सिफारिशों से किसानों के आंदोलन खत्म का रास्ता निकलेगा। घनवट ने कहा कि वह खुद किसान कम्युनिटी से हैं और कमिटी के सदस्य भी हैं लेकिन वह इस बात को लेकर दुखी हैं कि अभी तक किसानों का आंदोलन चल रहा है। हम सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाते हैं कि रिपोर्ट को पल्बिक डोमेन में रखा जाए और किसानों की समस्या के निदान के लिए रिपोर्ट में जो सिफारिश की गई है उसके अमल के लिए उसे पब्लिक किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी 2021 को कृषि कानून के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की कमिटी का गठन किया था जिसे दोनों पक्षों से बातचीत कर अपनी अनुशंसा के साथ रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपना था। कोर्ट ने कमिटी से 10 दिनों के भीतर पहली मीटिंग करने को कहा था और दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में तीन तरह की अर्जी दाखिल की गई है। इनमें पहली कैटगरी में कृषि कानून के संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है। दूसरी तरह की अर्जी में वैधता को सही ठहराया गया और कानून को लाभकारी बताया गया है तीसरी अर्जी में दिल्ली के लोगों ने प्रदर्शन के कारण उनके आने जाने के संवधानिक अधिकार के उल्लंघन का मामला उठाया है।