अब बेटियों के लिए भी खुलेंगे सैनिक स्कूल के दरवाजे… सरकार ने क्‍यों लिया फैसला?

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नई दिल्लीदेश की बेटियों के लिए अच्‍छी खबर है। वे किसी भी सैनिक स्‍कूल में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकेंगी। यानी देश के सभी सैनिक स्कूलों के दरवाजे अब उनके लिए भी खुलेंगे। ने रविवार को लाल किले की प्राचीर से इसका ऐलान किया। देश में अभी 33 सैनिक स्कूल चलाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ में ही लड़क‍ियों का दाखिला होता था।

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में कहा कि ढाई साल पहले मिजोरम में सैनिक स्कूलों में बेटियों के दाखिले का पहला प्रयोग किया गया था। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने अब फैसला किया है कि देश के सभी सैनिक स्कूल देश की बेटियों के लिए भी खोले जाएंगे।’

प्रधानमंत्री बोले, ‘यह देश के लिए गौरव की बात है कि शिक्षा हो या खेल, बोर्ड्स के नतीजे हों या ओलिंपिक का मेडल, हमारी बेटियां आज अभूतपूर्व प्रदर्शन कर रही हैं। आज भारत की बेटियां अपना स्पेस लेने के लिए आतुर हैं। मुझे लाखों बेटियों के संदेश मिलते थे कि वे भी सैनिक स्कूल में पढ़ना चाहती हैं, उनके लिए भी सैनिक स्कूलों के दरवाजे खोले जाएं।’

इस दौरान पीएम ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी जिक्र किया। उन्‍होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ‘गरीबी के खिलाफ लड़ाई’ का साधन बताया। पीएम बोले, ‘जब गरीब के बेटी, गरीब का बेटा मातृभाषा में पढ़कर प्रोफेशनल्स बनेंगे तो उनके सामर्थ्य के साथ न्याय होगा।’ उन्‍होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने वाली है।

सैनिक स्‍कूलों में कैसे होता है एडमिशन?
सैनिक स्कूलों का संचालन सैनिक स्कूल सोसायटी करती है। यह सोसायटी रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आती है। सैनिक स्कूलों की स्थापना का उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही भारतीय सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए तैयार करना था। ये स्कूल वीके कृष्ण मेनन के दिमाग की उपज हैं। मेनन अप्रैल 1957 से अक्टूबर 1962 तक केंद्रीय रक्षा मंत्री थे। उन्‍होंने 1961 में इस विचार की कल्पना की थी।

सैनिक स्‍कूलों में दाखिले के लिए ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेस एग्‍जाम (AISSEE) आयोजित कराया जाता है। यह एंट्रेंस एग्‍जाम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पैटर्न पर होता है। कक्षा 6 और 9 के लिए छात्रों को प्रवेश परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। कक्षा 11 के लिए प्रवेश का आधार कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंक होते हैं।

र‍िजर्वेशन का ध्‍यान रखना होगा
ध्यान देने वाली बात यह है कि 67 फीसदी सीटें उन छात्रों के लिए आरक्षित होती हैं जो किसी सैनिक स्कूल के गृह राज्य से हैं। बाकी 33 फीसदी छात्रों को गृह राज्य के बाहर से प्रवेश दिया जाता है। अनुसूचित जाति (15%), अनुसूचित जनजाति (7.5%), अन्य पिछड़ा वर्ग (27%) और वर्तमान और पूर्व सैनिकों (25%) के बच्चों के लिए भी आरक्षण है। इस समय देश में 33 सैनिक स्कूल हैं। उत्तर प्रदेश में तीन सैनिक स्कूल हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में दो-दो ऐसे स्कूल हैं।