‘किसान संसद’ ने सरकार के खिलाफ ‘अविश्वास’ प्रस्ताव पारित किया, कृषि कानून निरस्त न होने से नाराज

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नई दिल्लीकेंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की ओर से आयोजित ” में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। तीन विवादास्पद कानूनों को निरस्त नहीं करने को लेकर ऐसा किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने यह जानकारी दी।

एसकेएम ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों की मदद करने में सरकार की ‘विफलता’, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और हाल में पेगासस जासूसी विवाद उन मुद्दों में शामिल थे, जिन पर ‘किसान संसद’ के दौरान चर्चा की गई।

कृषि कानूनों के विरोध में 200 किसान रोजाना संसद के पास जंतर-मंतर में जुटते हैं। किसानों से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करते है। संसद में इस समय मॉनसूत्र सत्र चल रहा है।

एसकेएम ने कहा, ‘सरकार के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। यह प्रस्ताव इस तथ्य पर आधारित था कि देशभर में लाखों किसानों के शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद उनकी मांगों को पूरा नहीं किया किया जा रहा है। सरकार किसान विरोधी कदम उठा रही है।’

पेगासस, कृषि कानूनों और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर संसद के मॉनसून सत्र में शुरू से ही दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। 19 जुलाई से यह सत्र आरंभ हुआ था, लेकिन अब तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित होती रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पहुंच कर तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रकट की थी। साथ ही इन कानूनों को निरस्त करने की मांग की थी।

वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष के इस कदम को ‘मीडिया ईवेंट (मीडिया को ध्यान में रखकर किया गया आयोजन)’ करार दिया था। उन्‍होंने कहा था कि अगर विपक्षी दल किसानों के मुद्दों को लेकर ईमानदार होते तो संसद में चर्चा करते। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।