अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 25 km के दायरे में किसी भी तरह के ड्रोन की इजाजत नहीं

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नई दिल्ली
अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 25 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह के ड्रोन या अनमैन्ड एरियल वीइकल्स को उड़ने की इजाजत नहीं है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल और एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन समेत देश की सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 25 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह के अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) यानी मानवरहित उड़ान सिस्टम के उड़ने की इजाजत नहीं है।

पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए हथियारों और मादक पदार्थों को सीमा पार भेजे जाने की बढ़ती घटनाओं और जून में जम्मू एयरबेस पर ड्रोन से हुए अपने तरह के पहले आतंकी हमले के बीच सरकार का यह बयान काफी अहम है। ड्रोनों के रेग्युलेशन से जुड़े एक अतारांकित सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वीके सिंह ने लोकसभा को बताया कि 12 मार्च 2021 को अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) रुल्स, 2021 की अधिसूचना जारी हो चुकी है।

मंत्री ने अपने जवाब में बताया, ‘ये नियम ड्रोन के इस्तेमाल के तमाम पहलुओं से जुड़े हुए हैं जैसे रजिस्ट्रेशन, स्वामित्व, ट्रांसफर, आयात, ड्रोन ट्रैफिक मैनेजमेंट का संचालन, फीस का भुगतान और जुर्माने वगैरह। सभी तरह की सिविलियन ड्रोन गतिविधियां UAS रूल्स 2021 के जरिए रेग्युलेट हो रही हैं।’

क्या सरकार ने प्रोफेशनल वीडियोग्राफी में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन्स और रक्षा उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले अनमैन्ड एरियल वीइकल्स (UAVs) को अलग-अलग करके देख रही है, इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि UAS रूल्स 2021 प्रोफेशनल वीडियोग्राफी समेत सभी तरह के सिविलियन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो रहे UAV पर लागू हैं। लेकिन रक्षा उद्देश्यों के लिए UAV के ऑपरेशन पर UAS रूल्स लागू नहीं होंगे।

मंत्रालय ने कहा कि देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 25 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह के ड्रोन या अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम के उड़ने की इजाजत नहीं है। प्रतिबंधित इलाकों में सिर्फ केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही ड्रोन्स के इस्तेमाल की अनुमति होगी, वह भी असाधारण परिस्थितियों में।

मंत्रालय ने आगे कहा कि देश में ड्रोन्स के खतरे से निपटने के लिए 10 मई 2019 को गृह मंत्रालय ने जरूरी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है जिसमें केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों को सुरक्षा एजेंसियों के साथ चर्चा के बाद उठाए जाने वाले कदमों के बारे में भी बताया गया है।