SC ने केंद्र से कहा-महामारी से अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर फंड के तहत योजना का लाभ मिले

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोविड महामारी के दौरान जो भी बच्चे अनाथ हुए हैं उन सभी बच्चों को पीएम केयर फंड के तहत वेलफेयर स्कीम का लाभ मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ उन्हीं बच्चों तक वेलफेयर स्कीम का लाभ सीमित नहीं रहना चाहिए जिन बच्चों के पैरेंट्स कोविड के कारण चल बसे बल्कि उन तमाम अनाथ बच्चों को वेलफेयर स्कीम का लाभ मिलना चाहिए जो महामारी के दौरान अनाथ हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने कई स्कीम पेपर पर देखें हैं हम चाहते हैं कि अनाथ बच्चों तक असलियत में स्कीम का लाभ पहुंचे।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि पीएम केयर फंड के तहत वह बच्चे कवर हो रहे हैं जिनके दोनों पैरेंट्स या फिर एक बचे हुए पैरेंट्स की कोविड के कारण मौत हो गई। स्कीम के तहत 23 वें साल में बच्चों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मार्च 2020 के बाद जो भी बच्चे महामारी के दौरान अनाथ हुए हैं उन्हें स्कीम का लाभ मिलना चाहिए। अनाथ बच्चों के वेलफेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आदेश पारित करेंगे कि कोविड के दौरान जो भी बच्चे अनाथ हुए हैं उन सभी को वेलफेयर स्कीम के दायरे में लाया जाए। सिर्फ उन बच्चों के लिए स्कीम न हो जिनके पैरेंट्स की मौत कोविड से हुई बल्कि सभी अनाथ बच्चों के लिए स्कीम का लाभ मिलना चाहिए जो कोविड के दौरान अनाथ हुए हैं।

‘पेपर तक सीमित न रहे
स्कीम का लाभ’
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि जो जानकारी दी गई है उसके तहत कहा गया है कि 10 लाख रुपये की सहायता उन्हें मिलेगा जिनके पैरेंट्स कोविड के दौरान मरे हैं। हमारा मानना है कि महामारी की अवधि में जो भी बच्चे अनाथ हुए हैं उन्हें स्कीम का लाभ मिलना चाहिए।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एश्वर्य भाटी ने कहा कि पीएम केयर फंड के वेलफेयर स्कीम के तहत कोविड के कारण अनाथ बच्चों को कवर करने की बात है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सभी अनाथ बच्चों को कवर करने के लिए नहीं कह रहे हैं बल्कि महामारी के दौरान अनाथ हए बच्चों को कवर करने के लिए कह रहे हैं। चाहे किसी बच्चे के पैरेंट्स कोविड से मरे हों या किसी और तरह से लेकिन महामारी के दौरान जो भी बच्चे अनाथ हुए उन्हें स्कीम के तहत कवर किया जाए हम ये सोच रहे हैं। महामारी के दौरान अनाथ हुए तमाम बच्चों को इसमें कवर करने की जरूरत है। हम अपना आदेश सिर्फ कोविड के कारण मौत के मामले तक सीमित नहीं रख सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार चाइल्ड राइट्स सन्धि में हस्ताक्षरी भी है ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि वह अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी ले। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल भाटी ने कहा कि हम इस मामले में अथॉरिटी से स्पष्टीकरण पर निर्देश लेकर कोर्ट को अवगत कराएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो स्कीम है वह असल लाभार्थी तक पहुंचना चाहिए ये सिर्फ पेपर तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

महामारी से अनाथ बच्चोंं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों को तुरंत सहायता देने का निर्देश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एलएन राव की अगुवाई वाली बेंच ने देश भर के जिला एडमिनिस्ट्रेशन को आदेश दिया था कि वह 2020 मार्च के बाद से अनाथ बच्चों की पहचान करें और एनसीपीसीआर के वेबसाइट पर शनिवार तक डाटा अपलोड करें। अदालत ने ये भी कहा था कि इन बच्चों को तुरंत बेसिक जरूरत मुहैया कराया जाए और इसके लिए अदालत के ऑर्डर का इंतजार न किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमारी जानकारी में ये बात लाई गई है कि बड़ी संख्या में बच्चे कोविड के समय अनाथ हो गए हैं। कइयों के दोनों पैरेंट्स चले गए तो कइयों के कमाऊ पैरेंट्स नहीं रहे। कोर्ट सलाहाकर ने ऐसे बच्चों के बारे में चिंता जाहिर की थी। इन बच्चों को तुरंत सहायता देने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा था कि वह उन तमाम बच्चों की देखरेख करें जो कोविड के कारण अनाथ हुए हैं।

कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फंड से रिलीफ देने के बारे में क्या प्रारूप होगा इस पर काम करने के लिए केंद्र सरकार ने से वक्त मांगा था। सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार की ओर से बताया गया था कि पीएम केयर फंड से किस तरह से बच्चों को रिलीफ दिया जाए उसके तौर तरीकों पर बाचचीत जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को वक्त देते हुआ कहा था कि वह बताए कि इसे कैसे लागू किया जाएगा।