सरकार ने कोरोना पर आंकड़े छिपाने और राजनीति करने के आरोपों को किया खारिज

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नई दिल्ली
कोरोना महामारी को लेकर राजनीति करने और आंकड़े छिपाने के आरोपों को सिरे से नकारते हुए सरकार ने मंगलवार को कहा कि जिन राज्यों में कोरोना मैनेजमेंट की दिशा में बेहतर काम हुआ है, उनकी खुल कर तारीफ की गई है। सरकार ने कहा कि यह नहीं देखा गया कि उन राज्यों में कौन से दल की सरकार है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने ‘देश में कोविड-19 महामारी का प्रबंधन, टीकाकरण का कार्यान्वयन और संभावित तीसरी लहर को देखते हुए नीति और चुनौतियां’ विषय पर राज्यसभा में हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘कोविड महामारी के चर्चा में ज्यादातर सदस्यों ने, जो अच्छा हुआ उसका श्रेय अपने राज्य की सरकार को दिया लेकिन अगर अच्छा नहीं हुआ तो उसके लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया। सरकार में सबकी मिली-जुली जिम्मेदारी होती है।’

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उन राज्यों की सराहना की जहां बेहतरीन काम हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। 130 करोड़ जनता जब एक साथ संकल्प करेगी कि हमें महामारी की तीसरी लहर को नहीं आने देना है तो क्या वह लहर आ पाएगी?’

कोरोना महामारी को लेकर राजनीति करने और आंकड़े छिपाने के आरोपों को नकारते हुए मंडाविया ने कहा ‘राज्यों ने जब स्वयं श्रेय मांगा, तो प्रधानमंत्री ने इससे इनकार नहीं किया। राज्यों ने टीके आयात करने की अनुमति मांगी तो उन्हें यह अनुमति दी गई। यह अलग बात है कि टेंडर निकाले जाने पर टीका निर्माता कंपनियों ने राज्यों की ओर रुख नहीं किया। लॉकडाउन के दौरान भी राज्यों ने अपने अपने तरह से प्रयास किए और उन्हें सराहा गया।’

मंडाविया ने कहा, ‘जब सामूहिक प्रयासों से काम करने की बात आती है तो सरकार ने कभी यह नहीं कहा कि इस राज्य ने यह नहीं किया। जिस राज्य का कोविड प्रबंधन अच्छा रहा, उसकी हमने दिल खोल कर सराहना की। जो राज्य टीके की कमी का दावा कर रहे हैं उनमें से कुछ के पास पर्याप्त टीके रखे हुए हैं।’

उन्होंने कहा ‘जब दुनिया में यह महामारी फैल रही थी, उस वक्त जांच के लिए हमारे पास केवल एक प्रयोगशाला थी, हमारे पास पीपीई किट नहीं थे। तब महामारी से निपटने की तैयारी करने के लिए और वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन लगाया गया था। तब दूसरे देशों से हमारे पास दवाओं के लिए मांग आई और हमारे यहां से 64 देशों को दवाएं भेजी गईं और हमने देश पर गौरव किया था।’

मडाविया ने कहा, ‘खुद अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा था कि हिंदुस्तान ने संकट के समय हमारी मदद की जिसे हम नहीं भूल सकते। भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘शुभ लाभ’ की संस्कृति को मानने वाला देश है। हमारे साथ साथ दूसरों का भी भला होना चाहिए। यह सोच कर दूसरे देशों को भी टीका दिया गया। इतना ही नहीं, एक साल तक देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न सरकार की ओर से दिया गया। इसमें गैर सरकारी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं और लोगों ने भी मदद की।’

उन्होंने कहा, ‘कोरोना योद्धाओं, पुलिस कर्मियों, पैरामेडिकल स्टाफ ने अपनी जान पर खेल कर जिस तरह अपने कर्तव्य का पालन किया, उनकी सराहना के लिए और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए हमने ताली, थाली बजाई।’

मौत के आंकड़े छिपाने के आरोप को सिरे से नकारते हुए मंडाविया ने कहा, ‘ये आंकड़े छिपाने का कोई कारण नहीं है। मृत्यु के मामलों का पंजीकरण राज्यों में होता है। राज्य से आंकड़े आने के बाद उन्हें कम्पाइल (संकलित)कर केंद्र प्रकाशित करता है। केंद्र ने किसी भी राज्य को आंकड़े कम बताने के लिए नहीं कहा।’

टीके के बारे में मंडाविया ने कहा, ‘जिस देश में टीका तैयार होगा, रिसर्च होगी, जाहिर है कि वह देश पहले टीका लेगा। भारत बायोटेक और सीरम इन्स्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने टीका तैयार कर दिखाया। जब देश में टीका तैयार हो रहा है तो अब इसका उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। मैंने इस बारे में स्वयं कंपनियों से बात की। प्रधानमंत्री ने खुद टीका निर्माता कंपनियों, अनुसंधान कंपनियों से बात की। दुनिया के टीकों की तुलना में भारत के टीकों की कीमत कम है। सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया के टीके की 11 से 12 करोड़ खुराक मिलने लगी है। भारत बायोटेक का उत्पादन भी बढ़ रहा है।’

उन्होंने कहा कि टीका उत्पादन के लिए आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध होनी चाहिए। ‘भारत बायोटेक से हमने उत्पादन की इच्छुक कपंनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करने के लिए कहा। यह प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही इसके अच्छे नतीजे भी मिलेंगे।’ मंडाविया ने कहा कि दूसरे देशों की अन्य कंपनियों के टीके भारत में उपलब्ध हो सकें, इसलिए नियमों में ढील भी दी गई है।

मंत्री के जवाब के बाद एनसीपी के शरद पवार, द्रमुक के तिरूचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और सीपीआई के विनय विश्वम ने स्पष्टीकरण पूछे।