खादी का कुर्ता और कंधे पर गमछा…मिलिए, गजब की सादगी वाले रिटायर्ड IAS अफसर से

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मुंबई
अधिकारी बनने के बाद का मतलब क्या होता है..ठाठ बाट..खूब बढ़िया पोशाक, लेकिन हम जिनकी बात करने जा रहे हैं, वह अपने आप में ही अलग ओहदा रखते हैं। ओहदे से ज्यादा उनकी सादगी की चर्चा है और चर्चा भी ऐसी की आप भी हैरान रह जाएंगे। यहां तक की रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने अपनी इस सादगी का दामन नहीं छोड़ा है। हम बात कर रहे हैं रिटायर्ट आईएएस कमल टावरी की। कमल टावरी का जन्म 1 अगस्त, 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ था।

सादगी और ईमानदारी की हर तरफ चर्चा
खादी का कुर्ता, लुंगी और कंधे पर गमछा ये पहनावा देखकर अच्छे-अच्छे लोग गच्चा खा जाएंगे, लेकिन एक कहावत है न कि आपकी पहचान आपके कपड़ों से नहीं बल्कि आपके काम और व्यवहार से तय होती है। कुछ ऐसे ही हैं कमल टावरी जिनकी सादगी और ईमानदारी की चर्चा हर जगह होती है। कमल टावरी फौजी भी रहे हैं, आईएएस ऑफिसर के रूप में कलेक्टर भी रहे, कमिश्नर भी रहे, भारत सरकार में सचिव भी रहे, एक लेखक भी हैं, समाज सेवी और मोटिवेटर भी हैं।

रिटायर होने के बाद भी देश सेवा का काम बरकरार
2006 तक कई जिलों के कलेक्टर और कई जगहों के कमिश्नर रहने के अलावा राज्य और केन्द्र सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव रह चुके हैं। अब रिटायर होने के बाद भी उन्होंने देश सेवा का काम बरकरार रखा है, बस अब तरीका अलग है। इस समय वे बेरोजगारी पर प्रहार करने के लिए युवाओं जागरूक कर रहे हैं। वे युवाओं को स्वरोज़गार के लिए प्रेरित करते हैं तथा लोगों को तनाव मुक्त जीवन जीने का हुनर सिखाते हैं।

लिख डालीं हैं 40 पुस्तकें और एलएलबी और अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट
रिटायर्ड आईएएस कमल टावरी ने अभी तक 40 पुस्तकें भी लिखीं हैं। एलएलबी होने के साथ साथ अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल की है।लखनऊ के जवाहर भवन में ग्राम्य विकास आयुक्त के सभागार में कमल टावरी ने यह संकल्प लिया कि वह अब खादी के कपड़े ही पहनेंगे।

सम्मान की लड़ाई के लिए खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
साल 1983 में कमल टावरी और उनके साथ आईपीएस ऑफिसर एसएम नसीम एक संदिग्ध सरकारी बस का पीछा कर रहे थे। 15 किमी पीछा करने के बाद दोनों अधिकारियों ने आजमगढ़ के अतरौलिया में बस को रोक लिया। इसी दौरान बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने दोनों अधिकारियों पर बुरी तरह हमला कर दिया। मामला कोर्ट में पहुंच गया।

29 साल सब्र करने के बाद हक में आया फैसला
लगभग 29 साल बाद जब टावरी अपना केस इलाहाबाद कोर्ट में लेकर पहुंचे तब वहां से आदेश दिया गया कि इस केस पर लगातार छानबीन हो। अंत में 29 साल बाद 26 मार्च 2012 को इस केस का फैसला आया और दोनों आरोपियों को 3-3 साल की कैद हुई।

युवाओं को स्वरोजगार के लिए करते हैं प्रेरित
अपनी जिंदगी के 40 साल से ज़्यादा कई हाई क्लास ओहदो पर बैठने वाला शख्स आज गांव से लेकर युवाओं तक के लिए चिंतित है। कमल टावरी हर तरह से युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कमल टावरी अब ज्यादातर समय गांवों के विकास और युवाओं को रोजगार के तरीके सीखाने में बिताते हैं।