जनसंख्या नियंत्रण पर बोले नीतीश कुमार- केवल कानून बनाने से कुछ नहीं होगा

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पटना
जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जो राज्य जो करना चाहे करें लेकिन हमारी राय यह है कि सिर्फ क़ानून बनाने से जनसंख्या नियंत्रित हो जाएगी, ये संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं पूरी तरह पढ़ी लिखी होंगी तो प्रजनन दर कम होगी। हमें लगता है कि 2040 तक जनसंख्या बढ़ोतरी नहीं रहेगी और फिर ये घटना शुरू होगी।

जनसंख्या पर चीन को देखिए, दो बच्चों के बाद अब क्या हो रहा है: नीतीश
नीतीश कुमार ने कहा कि आप चीन को देख लीजिए, चीन ने एक से दो (बच्‍चों की संख्‍या) किया, अब दो के बाद क्‍या हो रहा है। आप किसी भी देश का हाल देख लीजिए। यह सबसे बड़ी चीज है कि महिलाएं पढ़ी-लिखी रहेंगी तो इतनी जागृति आती है कि प्रजनन दर अपने आप कम होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के शिक्षित होने से समाज के हर वर्ग पर असर होगा।

महिलाओं के शिक्षित होने से प्रजनन दर पर पड़ेगा असर: सीएम नीतीश
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित होंगी तो वे पर्याप्त रूप से जागरूक होंगी। तब इसका असर प्रजनन दर पर पड़ेगा, फिर प्रजनन दर घटेगी। महिलाओं की शिक्षा पर हम काफी पहले से ही काम कर रहे हैं। हालांकि देखा होगा कि कुछ पढ़े-लिखे लोगों ने भी ज्यादा बच्चे पैदा किए हैं। इसलिए हम तो बहुत ज्यादा कानून के पक्ष में नहीं है।

2030 तक प्रभावी रहेगी यूपी की जनसंख्या नीति
सीएम योगी ने यूपी में 2021-2030 तक की जनसंख्या नीति लागू करते हुए कहा कि आबादी विस्तार के लिए गरीबी और अशिक्षा बड़ा कारक है। कुछ समुदायों में भी जनसंख्या को लेकर जागरूकता का अभाव है। ऐसे में समुदाय केंद्रित जागरूकता के प्रयास की जरूरत है। नई जनसंख्या नीति 2030 तक प्रभावी रहेगी। योगी सरकार चाहती है कि नई नीति में सभी समुदायों में जनसांख्यकीय संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित प्रयासों पर जोर दिया जाए।

असम के सीएम ने जनसंख्या नीति के लिए की थी मुस्लिम हस्तियों से बात
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा जनसंख्या नीति के लिए पिछले हफ्ते रविवार को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 150 से अधिक मुस्लिम हस्तियों से मुलाकात की थी। उन्‍होंने कहा कि वे सभी इस बात पर सहमत थे कि राज्य के कुछ हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि विकास के लिए खतरा है। अल्पसंख्यकों के विकास से संबंधित उपाय सुझाने के लिए आठ उप-समूह बनाए जाएंगे, जिनमें सदस्य के रूप में राज्य के जातीय मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल होंगे।