बूढ़े हो चले हैं भारतीय सेना के ‘चीता’ और ‘चेतक’, चीन से गतिरोध के बीच सैन्य बलों ने रखी ये मांग

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नई दिल्ली
भारतीय सैन्य बल में शामिल हल्के हेलीकॉप्टर चीता और चेतक हेलीकॉप्टर अब पुराने पड़ चुके हैं। चीन के साथ मौजूदा गतिरोध और पाकिस्तान के साथ लगातार तनाव के बीच सैन्य बल जल्द से जल्द इनकी जगह नए हल्के हेलीकॉप्टर को अपने बेड़े में शामिल करना चाहते हैं। केंद्र सरकार इन पुराने पड़ चुके हेलीकॉप्टर के स्थान पर रूसी कामोव-226टी हेलीकॉप्टर्स खरीदने का फैसला कर चुकी है लेकिन लालफीताशाही की वजह से अभी तक इनकी खरीद को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।

तकनीकी समस्या के साथ ही अधिक दुर्घटना है वजहरक्षा सूत्रों का कहना है कि 1960-1970 के दशक के पुराने सिंगल-इंजन चीता और चेतक को बदलने की आवश्यकता है। इन हेलीकॉटर्स से होने वाले एक्सिडेंट की संख्या अधिक है। साथ ही इनकी सर्विस से जुड़ी भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा समय में यह हेलीकॉप्टर अब अधिक उपयोगी नहीं रह गए हैं।

चीन से सटी सीमा पर उपलब्धतता 50 फीसदी कम हुईसूत्र का कहना है कि चीन के साथ उत्तरी सीमाओं के साथ-साथ पाकिस्तान के साथ सियाचिन ग्लेशियर-साल्टोरो रिज क्षेत्र में चीतों / चेतकों की परिचालन उपलब्धता 50% तक कम हो चुकी है। पुराने चीतों/चेतकों का टेक्निकल लाइफ 2023 में समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में दुश्मन की टोह लेने के साथ ही अग्रिम इलाकों में सैनिकों की तैनाती के लिए नए हल्के हेलीकॉप्टर (एलयूएच) की सख्त जरूरत है।

498 हेलीकॉप्टर्स की जरूरतआर्मी, वायुसेना और नौसेना लगभग 20 वर्षों से नए एलयूएच की मांग कर रहे हैं। तीनों सैन्य बलों को कुल 498 हेलिकॉप्टरों की जरूरत है। विदेश से ऐसे 197 हेलिकॉप्टरों की प्रस्तावित खरीद को दो बार रद्द कर दिए जाने के बाद, सरकार ने 2015 में सेना (135) और IAF (65) के लिए 200 ट्विन-इंजन कामोव-226T हेलिकॉप्टरों की खरीद के लिए रूस के साथ समझौता किया था। इनमें से पहले 60 को फ्लाई-अवे स्थिति में आना था, अन्य 140 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) और रोस्टेक कॉर्प/रूसी हेलीकॉप्टरों के बीच एक संयुक्त उद्यम में बनाया जाना था।

तकनीकी मूल्याकंन में अटकी परियोजनाएक अन्य रक्षा सूत्र के अनुसार समझौते के बावजदू परियोजना अभी भी तकनीकी मूल्यांकन के चरण में अटकी हुई है। इसमें मुख्य रूप से स्वदेशी सामग्री के अनुपात पर असहमति एक वजह है। रूस भारत की तुलना में थोड़ा कम स्वदेशी सामग्री की पेशकश कर रहा है। सेना के लिए एक और 126 स्वदेशी एलयूएच और आईएएफ के लिए 61 हेलीकॉप्टर्स बनाने के लिए एक अलग एचएएल परियोजना भी वर्षों से अटकी हुई है।