सरकार और ट्विटर के बीच तनातनी के बीच RSS ने कू पर खोला खाता, क्या है इशारा?

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नई दिल्ली
ऐसे समय में जब नए आईटी नियमों को लेकर सरकार और ट्विटर में ठनी हुई है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देसी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू जॉइन किया है। कू को ट्विटर का देसी विकल्प बताया जाता है। इससे पहले केंद्र के कई मंत्री और मंत्रालय भी कू जॉइन कर चुके हैं। ट्विटर के साथ जारी लड़ाई के बीच सत्ताधारी बीजेपी के मातृ संगठन संघ का कू जॉइन करना काफी अहम है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च हुआ कू तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और उन लोगों को पसंदीदा ठिकाना बनकर उभर रहा है जिनका किसी कारण से ट्विटर से मोहभंग हो रहा है।

आरएसएस ने कू पर अपने पहले पोस्ट में अपने संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को उद्धृत किया है। पोस्ट में लिखा है, ‘भारत सिर्फ भू-भाग नहीं है बल्कि वास्तविक सजीव मां है। यह वात्सल्यमयी, मंगलकारी, पुण्यभूमि, हिंदूभूमि है। हम अपनी प्रार्थनाओं में यही कहते हैं।’ हेडगेवार ने ही 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। वह पहले सरसंघचालक थे।

कू ने एक बयान में कहा है कि उसके प्लेटफार्म से जुड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजनीति, खेल और मनोरंजन से बड़ी संख्या में हस्तियों ने सोशल मीडिया मंच पर अपना खाता खोला हैं। उसने कहा, ‘कू के साथ जुड़ने वाला नया प्रसिद्ध संगठन आरएसएस हैं। संघ ने कू पर लोगों के साथ जुड़ने के लिए बुधवार को अपना खाता खोला। आरएसएस का कू पर @आरएसएसडॉटओआरजी नाम से खाता है।’

आरएसएस अब कू पर हिंदी में अपने फैसलों और विचारों के बारे में पोस्ट करेगा। बुधवार को उसने चित्रकूट के अपने 5 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के बारे में जानकारी दी। एमपी के चित्रकूट में 8 जुलाई से शुरू हुआ संघ का यह कार्यक्रम 5 दिनों तक चलना है।

ट्विटर बनाम सरकार की ‘जंग’ इस साल जनवरी के आखिर में शुरू हुई। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसानों की ‘ट्रैक्टर रैली’ हिंसक हो गई। उस दौरान ट्विटर पर कथित तौर पर कई फेक न्यूज और भड़काऊ कंटेंट शेयर किए जा रहे थे। 31 जनवरी को सरकार ने ट्विटर से कुछ अकाउंट्स के खिलाफ ऐक्शन को कहा। ट्विटर ने अनमने ढंग से कुछ अकाउंट्स को ब्लॉक तो किया लेकिन कुछ देर बाद अनब्लॉक भी कर दिया। इससे सरकार की भृकुटी तन गई। इस बीच 25 फरवरी को सरकार ने नए आईटी नियम जारी किए। इसके तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत में एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करना अनिवार्य कर दिया गया। 25 मई को नए आईटी नियम लागू भी हो गए लेकिन ट्विटर ने अबतक उसका पालन नहीं किया है।

इस बीच ‘ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट’ केस, लद्दाख के गलत नक्शे, कुछ बीजेपी प्रवक्ताओं के पोस्ट्स पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग, उपराष्ट्रपति और संघ के कुछ नेताओं के हैंडल से ब्लू टिक हटाए जाने और रविशंकर प्रसाद के अकाउंट को कुछ देर के लिए ब्लॉक करने से सरकार और ट्विटर का तनाव बढ़ता ही जा रहा है।