युवा जोश, क्षेत्रीय संतुलन, चुनावी राज्य…मोदी मंत्रिपरिषद विस्तार की खास बातें

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नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिपरिषद विस्तार में कई युवाओं को मौका दिया है। मंत्रिपरिषद विस्तार में चुनावी राज्यों का खास ख्याल रखा गया है। इसके अलावा जेडीयू, एलजेपी और अपना दल जैसे गठबंधन सहयोगियों को भी प्रतिनिधित्व दिया है। मंत्रिपरिषद विस्तार में क्षेत्रीय से लेकर जातिगत समीकरणों को भी साधने की कोशिश की गई है, वहीं प्रशासनिक अनुभव वालों को भी जगह दी गई है। आइए, देखते हैं मोदी मंत्रिपरिषद विस्तार की खास बातें-

युवा जोश
मोदी मंत्रिपरिषद में शामिल नए 36 मंत्रियों में 8 ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल से कम है। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार से पहली बार सांसद बने निशिथ प्रमाणिक सबसे कम उम्र के मंत्री हैं। उनकी उम्र महज 35 साल है। वहीं बंगाल के ही बनगांव से पहली बार सांसद बने शांतनु ठाकुर की उम्र 38 साल है। वह बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे पर उनके साथ गए थे। इनके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया (50), अश्विनी वैष्णव (50), अनुप्रिया पटेल (40), भारती प्रवीण पवार (42), जान बरला (45) और एल. मुरुगन (44) की उम्र 50 साल या उससे कम है। मंत्रिपरिषद विस्तार के बाद अब टीम मोदी की औसत उम्र 58 साल हो गई है।

चुनावी राज्यों पर खास फोकस
मंत्रिपरिषद विस्तार में उन राज्यों पर खास फोकस रखा गया है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। मंत्रिपरिषद विस्तार में सबसे ज्यादा 7 नए चेहरे यूपी से ही रखे गए हैं। इनमें महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी, मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर, आगरा से एमपी एसपी सिंह बघेल, खीरी से सांसद अजय मिश्र, पूर्वी सीएम कल्याण सिंह के खास और राज्यसभा सांसद बीएल वर्मा और जालौन से सांसद भानु प्रताप वर्मा को भी जगह दी गई है। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी अपना दल (एस) की प्रमुख और मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को भी फिर से केंद्र में मौका दिया गया है।

मंत्रिपरिषद में पंजाब से कोई नया चेहरा तो शामिल नहीं हुआ लेकिन हरदीप पुरी का प्रमोशन किया गया है। इसी तरह उत्तराखंड से अजय भट्ट को जगह दी गई है। इस तरह रमेश पोखरियाल निशंक के इस्तीफे के बाद राज्य से एक नया मंत्री बनाया गया है। मणिपुर में भी अगले साल चुनाव है। वहां से राजकुमार रंजन सिंह को मंत्रिपरिषद में शामिल कर स्थानीय सियासी गणित को साधने की कोशिश की गई है।

बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात से कई मंत्री
पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक से 4-4 नए मंत्री बनाए गए हैं। इसके अलावा गुजरात से 3 और मंत्रियों को जगह मिली है। इससे जाहिर होता है कि बीजेपी बंगाल को लेकर कितनी गंभीर है। बाबुल सुप्रियो और देबोश्री चौधरी भी बंगाल से हैं जिन्होंने विस्तार से पहले मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया। महाराष्ट्र में भी बीजेपी शिवसेना से अलग होने के बाद अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी हुई है। वहीं बीजेपी ने दक्षिण के अपने इकलौते किले कर्नाटक का भी खास ध्यान रखा है। पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात से 3 नए मंत्री बने हैं।

सहयोगी दलों को साधा
राम विलास पासवान के निधन के बाद मोदी मंत्रिपरिषद में सिर्फ रामदास आठवले ही गैर-बीजेपी मंत्री थे। लेकिन मंत्रिपरिषद विस्तार में जेडीयू से आरसीपी सिंह, एलजेपी के बागी गुट के पशुपति पारस और यूपी में अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल को जगह देकर बीजेपी ने मोदी कैबिनेट को ‘एनडीए कैबिनेट’ का रूप देने की कोशिश की है।

क्षेत्रीय संतुलन
मोदी मंत्रिपरिषद विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन को भी साधने की कोशिश की गई है। हिंदी हार्टलैंड से लेकर पूर्वोत्तर, पश्चिम से लेकर पूर्वी भारत और दक्षिण भारत तक को प्रतिनिधित्व देने की भरपूर कोशिश की गई है। दक्षिण में कर्नाटक के 4 मंत्रियों के अलावा तमिलनाडु से एल. मुरुगन को भी मंत्री बनाया गया है। मुरुगन संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उन्हें थावर चंद गहलोत के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर बाकी के कार्यकाल के लिए राज्यसभा भेजा जा सकता है। गहलोत का राज्यसभा कार्यकाल 2024 तक था।

पूर्व मुख्यमंत्री
मोदी कैबिनेट में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे और असम के पूर्व सीएम सर्वानंद सोनोवाल को जगह दी गई है।

नए मंत्रियों में एक संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं
44 साल के एल. मुरुगन तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष हैं। उन्हें मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिली है। नए मंत्रियों में वह इकलौते हैं जो न तो लोकसभा के सदस्य हैं और न हीं राज्यसभा के। राजनीति में आने से पहले वह मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करते थे। 2017 से 2020 तक वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे। उन्हें थावर चंद गहलोत के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर बाकी के कार्यकाल के लिए राज्यसभा भेजा जा सकता है। गहलोत का राज्यसभा कार्यकाल 2024 तक था।

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
मोदी मंत्रिपरिषद विस्तार में 7 महिलाओं को भी जगह दी गई है। इनमें मीनाक्षी लेखी, अनुप्रिया पटेल, अन्नपूर्णा देवी, भारती प्रवीण पवार, प्रतिमा भौमिक, दर्शना विक्रम जरदोश और शोभा करंदलाजे शामिल हैं। इस तरह अब टीम मोदी में महिला मंत्रियों की संख्या 11 हो गई है।

प्रशासनिक अनुभव और प्रोफेशनल्स को भी जगह
जेडीयू कोटे से मंत्री बने आरसीपी सिंह और ओडिशा से बीजेपी सांसद अश्विनी वैष्णव नौकरशाह रह चुके हैं। आरसीपी राजनीति में आने से पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार के प्रमुख सचिव रहे थे। वहीं, अश्विनी वैष्णव 1994 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। इसके अलावा नए मंत्रियों में 4 एमबीबीएस/एमएस हैं। नए चेहरों में कुछ ने पीएचडी किया हुआ है तो कुछ ने बीटेक, एमटेक, लॉ और एमबीए किया हुआ है। इस तरह टीम मोदी में अब कुल 13 वकील, 6 डॉक्टर, 5 इंजीनियर, 7 नौकरशाह, 7 पीएचडी और 3 एमबीए डिग्रीधारी शामिल हैं।