दिग्विजय ने फिर छेड़ा आर्टिकल 370 का राग, कश्मीरी नेताओं को कहा थैंक यू

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भोपाल
बीजेपी की तमाम आलोचनाओं के बाद भी आर्टिकल 370 पर बयान देने से बाज नहीं आ रहे। शुक्रवार को उन्होंने एक बार फिर जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 समाप्त करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। दिग्विजय ने फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का धन्यवाद भी किया है।

दिग्विजय ने कहा कि पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बारे में किसी से कोई विचार-विमर्श नहीं किया। फैसला लेने के बाद भी वे इस पर कोई चर्चा करने को तैयार नहीं थे। दिग्गी ने कहा कि फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ कश्मीर के सभी लोग कह रहे हैं कि हम 370 के बिना नहीं मानेंगे। उनकी जिद के बाद ही मोदी जी ने इस पर चर्चा शुरू की। दिग्विजय ने इसके लिए कश्मीरी नेताओं और वहां के लोगों को धन्यवाद दिया।

करीब तीन सप्ताह पहले क्लबहाउस चैट में दिग्विजय ने कहा था कि कांग्रेस सत्ता में लौटी तो आर्टिकल 370 की दोबारा बहाली पर विचार किया जाएगा। उनका बयान आते ही बीजेपी नेताओं ने उनकी आलोचना शुरू कर दी। एमपी के सीएम दिग्विजय सिंह ने उन्हें तालिबानी दिमाग करार दिया तो बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दिग्विजय के संपर्कों की एनआईए से जांच कराई जानी चाहिए।

आलोचनाओं के बाद दिग्विजय ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने इस मामले में ट्विटर को नोटिस भी भेजा, लेकिन इस मुद्दे पर बयान देना नहीं छोड़ा। प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई तो उन्होंने कह दिया कि मोदी फैसला पहले लेते हैं, सोचते बाद में हैं।

24 जून को हुई सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि वह इस पूर्ववर्ती राज्य से ‘‘दिल्ली की दूरी’’ के साथ ही ‘‘दिलों की दूरियों’’ को मिटाना चाहते हैं। पीएम ने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन सभी को राष्टहित में काम करना चाहिए ताकि प्रदेश की जनता को इसका फायदा मिल सके।

बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला, उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद सहित चार पूर्व मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया था। बैठक का मुख्य मुद्दा केंद्रशासित प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना था और प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में इसकी बहाली को लेकर प्रतिबद्ध है।

दिग्गी के ताजा बयान से एक बार फिर सियासी सरगर्मियां बढ़ सकती हैं। देखना यह है कि बीजेपी नेता अब इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।