आरक्षण मामले में 5 मई के फैसले के खिलाफ केंद्र की रिव्यू पिटिशन सुप्रीम कोर्ट में खारिज

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस रिव्यू याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 5 मई के रिजर्वेशन मामले में दिए फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से दिए फैसले में कहा था कि 102वें संशोधन के बाद राज्यों के पास सामाजिक व शैक्षणिक तौर पर पिछड़ों की पहचान कर लिस्ट बनाने का अधिकार नहीं है। फैसले में कहा गया था कि किसी समुदाय को पिछड़े वर्ग की सूची में डालना या उससे बाहर करने के बाद अंतिम सूची पर फैसला राष्ट्रपति पर निर्भर करता है।

केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर रिव्यू याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने जो भी आधार रिव्यू के लिए दिए है उनको पहले ही 5 मई के फैसले में डील किया जा चुका है। कोर्ट ने कहा, ‘हमें पुनर्विचार याचिका पर विचार करने का कोई पर्याप्त आधार दिखाई नहीं देता। पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है।’ 5 मई के फैसले में व्यवस्था दी गई थी कि संविधान में 102वें संशोधन के बाद नौकरियों और दाखिलों के लिए सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) की घोषणा करने की शक्ति राज्यों के पास नहीं रही है।

5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मराठा रिजर्वेशन को गैरसंवैधानिक घोषित किया था
इस साल 5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मराठा रिजर्वेशन को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि महाराष्ट्र में मराठा कम्युनिटी को सरकारी नौकरी और एजुकेशनल संस्थान में दाखिले के लिए दिया गया रिजर्वेशन 50 फीसदी के लिमिट को पार करता है।

इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिए जजमेंट में रिजर्वेशन के लिए 50 फीसदी लिमिट तय किया गया था। इस मामले में रिजर्वेशन तय 50 फीसदी के लिमिट को पार करता है और इस तरह मराठा रिजर्वेशन गैरसंवैधानिक है।

शीर्ष अदालत ने 102वें संविधान संशोधन को सही ठहराया
शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद-342 ए और 102वें संविधान संशोधन पर अलग-अलग मत व्यक्त किया। वैसे बहुमत से सुप्रीम कोर्ट ने 102वें संशोधन को सही ठहराया था। इसके तहत तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया था। बहुमत से 102वें संविधान संशोधन को वैध करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि राज्य सरकारें सामाजिक और शैक्षणिक बैकवर्ड क्लास (एसईबीसी) की लिस्ट तय नहीं कर सकती। बल्कि सिर्फ राष्ट्रपति उस लिस्ट को नोटिफाई कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल था कि क्या अनुच्छेद-342 ए राज्य को एसईबीसी लिस्ट बनाने के अधिकार से वंचित करता है।

संसद ने 2018 में 102वें संविधान संशोधन को मंजूरी दी थी। इसी संशोधन के जरिए राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया था।