अमेरिका की तर्ज पर यूपी में होगा कैनाल फ्लो, खत्म होगी सिंचाई की समस्या!

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अमित तिवारी
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कासगंज
जिले का 136 साल पुराना कैनाल सिस्टम अब हाईटेक टेक्नोलॉजी से लैस होकर पूरी तरह बदलने वाला है। इसके लिए दुनिया की सबसे खास तकनीकी का प्रयोग कासगंज की कैनाल में किया जा रहा है। कासगंज के कैनाल का फ्लो और डिस्चार्ज कंट्रोल सिस्टम अब ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की तर्ज़ पर हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HIS) टेक्नोलॉजी से डिज़ाइन किया गया है। इसकी लखनऊ स्थित इन्फॉर्मेशन सिस्टम ऑफिस (ISO) से 24 घंटे रियल टाइम में मॉनिटरिंग और कंट्रोलिंग की जाएगी। इस टेक्नोलॉजी के प्रयोग से आने वाले दिनों में कासगंज जिले की कैनाल में जरूरत से कम पानी व टेल तक पानी न पहुंचने और समय से सिंचाई के पानी न मिलने की समस्या अब पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग सिस्टम पर आधारित है नई टेक्नोलॉजी
हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HIS) टेक्नोलॉजी का प्रयोग ऑस्ट्रेलिया अमेरिका मेक्सिको, स्पेन और चीन सहित 10 देशों में पिछले कई सालों से हो रहा है। यह टेक्नोलॉजी सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग सिस्टम पर आधारित है, जिसमें कैनाल के ऊपर एक फील्ड डिवाइस लगाई जाती है, जो हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HIS) की एक रिमोट टर्मिनल यूनिट (RTU) का हिस्सा होती हैं। कैनाल के ऊपर लगाए गए इस डिवाइस से पानी का रियल टाइम फ्लो-रेट गेज लेवल क्वालिटी, क्वांटिटी व डिस्चार्ज का एनालिसिस और मॉनिटरिंग एक कंट्रोल रूम के जरिये एक्सपर्ट के द्वारा की जाती है।

ऑटोमैटिक फ्लडगेट कंट्रोल सिस्टम लगाने की योजना
कासगंज जिले के अधिशाषी अभियंता (सिंचाई) इंजीनियर अरुण कुमार ने बताया कि शुरुआत के दौरान नदरई लोअर गंगा कैनाल व फर्रुखाबाद ब्रांच कैनाल सहित कुल 2 कैनाल में ऐसे 10 हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HIS) फील्ड डिवाइस लगाए गए हैं। वहीं आने वाले दिनों में बड़ी कैनाल से छोटी कैनाल में पानी डिस्चार्ज करने के लिए लगे पुराने गेट को मॉडिफाई किया जायेगा और वहीं उनके स्थान पर अब ऑटोमैटिक फ्लडगेट कंट्रोल सिस्टम लगाए जायेंगे, जिसका रियल टाइम कंट्रोल लखनऊ स्थित इन्फॉर्मेशन सिस्टम ऑफिस (ISO) से होगा।

एक लाख हेक्टेयर खेती के लिए संजीवनी है यह कैनाल
इंजीनियर अरुण कुमार बताते हैं कि कासगंज में कुल 345 किलोमीटर का कैनाल नेटवर्क है, जिससे तक़रीबन 1 लाख हेक्टेयर के आसपास कृषि भूमि की सिंचाई होती है। मैनुअली इतने बड़े कैनाल नेटवर्क को कंट्रोल करने में विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब सैटेलाइट बेस्ड इस हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HIS) की रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी के प्रयोग से यह पूरी व्यवस्था बिना किसी खामी के काम करेगी।