जम्मू-कश्मीर को लेकर आगे क्या है प्लान, सर्वदलीय बैठक कर मोदी ने देश को बताया

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नई दिल्लीकरीब 22 महीने पहले जब अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला किया था, तब घाटी के नेताओं की तरफ से तीखी बयानबाजियां हुई थीं। तमाम नेता नजरबंद कर दिए गए, बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात रहे, लंबे समय तक इंटरनेट सस्पेंड रहा। अब हालात बदल चुके हैं। वही नेता जो तल्ख-जुबानी कर रहे थे, गुरुवार को पीएम मोदी के साथ दिल्ली में सौहार्द के माहौल में राज्य के भविष्य को लेकर चर्चा कर रहे थे। दिलो की दूरियां मिटाने की बातें हो रही थीं। बैठक के बाद पीएम मोदी ने संकेत दिए कि सरकार जम्मू-कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी में जुटी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया तेज गति से पूरी होनी है ताकि वहां विधानसभा चुनाव कराए जा सकें और एक निर्वाचित सरकार का गठन हो सके जो प्रदेश के विकास को मजबूती दे। जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने सिलसिलेवार ट्वीट कर यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता केंद्रशासित प्रदेश में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है।

सर्वदलीय बैठक को जम्मू-कश्मीर को विकसित प्रदेश के रूप में लाने के लिए जारी प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है।’ उन्होंने कहा, ‘परिसीमन तेज गति से होना है ताकि जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो सकें और वहां एक चुनी हुई सरकार मिले जिससे राज्य के चौतरफा विकास को मजबूती मिले।’

बैठकर चर्चा करने और विचारों के आदान-प्रदान को लोकतंत्र की बड़ी मजबूती करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैंने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि लोगों को, विशेषकर युवाओं को जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करना है और उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति सुनिश्चित करना है।’

सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बैठक में शामिल नेताओं की ओर से आए सभी सुझावों और तर्कों को गौर से सुना और कहा कि सभी ने खुले मन से बैठक में अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि बैठक खुली चर्चा के लिए बुलाई गई थी जिसके केंद्र में कश्मीर का बेहतरीन भविष्य निर्माण करना था।

बैठक का मुख्य मुद्दा केंद्रशासित प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना था और प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में इसकी बहाली को लेकर प्रतिबद्ध है। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने जिला विकास परिषद के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न होने की तरह ही वहां विधानसभा चुनाव संपन्न कराने पर जोर दिया।

बैठक में परिसीमन के बाद वहां चुनाव कराने को लेकर चर्चा हुई और लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी सहमति जताई। प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि जम्मू-कश्मीर में यदि एक भी जान जाती है तो वह बहुत दुखद है और भावी पीढ़ी की सुरक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्रशासित प्रदेश के युवाओं को मौके देने पर बल दिया और कहा कि वे वापस देश को इसका फल देंगे।

इससे पहले, सर्वदलीय बैठक में शामिल ज्यादातर राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और जल्द से जल्द विधानसभा का चुनाव संपन्न कराने की मांग उठाई।

पिछले करीब दो सालों में पहली बार जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वार्ता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस केंद्रशासित प्रदेश के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए वहां के 14 नेताओं के साथ यह अहम बैठक की।

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद यह पहली ऐसी बैठक है जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की।