कोरोना की तीसरी लहर से बचना है तो इन 5 ‘रणनीतियों’ पर फोकस जरूरी, केंद्र ने राज्यों को किया आगाह

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नई दिल्ली
तेलंगाना, कर्नाटक समेत देश के कई राज्यों में लॉकडाउन में छूट दी गई है। छूट मिलते ही लोग एकबार फिर से लापरवाही करने लगे हैं जिसे देखते हुए एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने आगाह किया है कि अगर कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया तो भारत में 6 से 8 हफ्ते में आ सकती है। इस बीच केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की है कि वह टीकाकरण अभियान को तेज करें और कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन हटाते समय कोविड अनुकूल व्यवहार, जांच-निगरानी-इलाज (टेस्टिंग, ट्रैसिंग और ट्रीटमेंट) और वैक्सीनेशन जैसी ‘अति महत्वपूर्ण’ 5 रणनीतियां अपनाएं।

सावधानीपूर्वक हटाया जाए लॉकडाउन
सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे संदेश में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि संक्रमण के प्रसार की कड़ी को तोड़ने के लिए मौजूदा परिदृश्य में कोविड-19 रोधी टीकाकरण बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य और केंद्र शासित प्रदेश टीकाकरण की गति तेज करें। गृह सचिव ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और कइयों ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए। उन्होंने कहा, ‘संक्रमण के मामलों में कमी को देखते हुए कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्रतिबंधों में राहत देना शुरू किया है, ऐसे में मैं यह रेखांकित करना चाहूंगा कि लॉकडाउन हटाने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक व्यवस्थित और जमीनी स्थिति के आकलन के आधार पर हो।’

बाजारों में नहीं हुआ कोविड नियमों का पालन
गृह सचिव ने कहा कि संक्रमण से निपटने के लिए कोविड अनुकूल व्यवहार की नियमित निगरानी की जरूरत है ताकि खामियों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि इस व्यवहार में मास्क का इस्तेमाल, हाथ धोना, सामाजिक दूरी बनाये रखना और बंद स्थलों का हवादार होना सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा, ‘कुछ राज्यों में प्रतिबंधों में राहत से बाजार में भीड़ एकत्र हो गई और कोविड-19 से बचाव संबंधी नियमों का पालन नहीं किया गया।’ उन्होंने कहा कि संक्रमण के प्रसार पर सतत आधार पर नियंत्रित करने के लिए यह आवश्यक है कि जांच-निगरानी-इलाज जैसी रणनीति का सहारा लिया जाए और खासतौर पर यह सुनिश्चित हो कि जांच दर में कमी न होने पाए।

6 से 8 हफ्तों में कोरोना की तीसरी लहर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी कि अगर कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया तो अगले 6 से 8 हफ्तों में कोरोना की तीसरी लहर देश में दस्तक दे सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक बड़ी संख्या में आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोविड-उपयुक्त व्यवहार का आक्रामक तरीके से पालन करने की आवश्यकता है। इससे पहले, भारत के महामारी विज्ञानियों ने संकेत दिया था कि कोविड-19 की तीसरी लहर तय है और इसके सितंबर-अक्टूबर से शुरू होने की आशंका है।

संक्रमण में वृद्धि के शुरुआती संकेत पर नजर रखने की जरूरत
गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि चूंकि महामारी की स्थिति में बदलाव होता रहता है, ऐसे में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में वृद्धि या फिर संक्रमण दर में वृद्धि की शुरुआती संकेत पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लघु स्तर पर एक ऐसा तंत्र बनाने की जरूरत है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जब कभी भी छोटे स्थलों पर मामले बढ़ने शुरू हो, उससे वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दिशानिर्देशों के अनुसार स्थानीय नियंत्रण कदमों के जरिए निपटा जाए।

74 दिनों के बाद सबसे कम ऐक्टिव केस
देश में एक दिन में कोविड-19 के 60,753 नए मामले आने के बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,98,23,546 हो गई है, जबकि ऐक्टिव केसों की संख्या 7,60,019 हो गई है जो 74 दिनों में सबसे कम है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह 8 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, 1,647 और लोगों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या 3,85,137 हो गई है। ऐक्टिव केसों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 2.55% है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले लोगों की राष्ट्रीय दर 96.16% है।