मोदी के करीबी पूर्व IAS शर्मा को UP का डेप्युटी CM बनाने की थीं अटकलें, बीजेपी ने दी यह जिम्मेदारी

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लखनऊ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेता और पूर्व आईएएस एके शर्मा को उत्‍तर प्रदेश बीजेपी का नया उपाध्‍यक्ष बनाया गया है। शर्मा कुछ महीनों पहले ही बीजेपी में शामिल हुए हैं। पिछले दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज थी कि जल्‍द ही योगी मंत्रिमंडल का विस्‍तार कर एके शर्मा को डेप्‍युट सीएम बनाया जा सकता है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के दिल्‍ली में पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला था।

एके शर्मा के अलावा कुछ और नेताओं को भी पार्टी में नई जिम्‍मदारी दी गई हैं। यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पार्टी के विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की है। प्रांशुदत्त द्विवेदी (फर्रुखाबाद) को युवा मोर्चा, गीताशाक्य राज्यसभा सांसद (औरैया) को महिला मोर्चा, कामेश्वर सिंह (गोरखपुर) को किसान मोर्चा और नरेंद्र कश्यप पूर्व सांसद (गाजियाबाद) को पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, कौशल किशोर सांसद को अनुसूचित जाति मोर्चा, संजय गोण्ड (गोरखपुर) को अनुसूचित जनजाति मोर्चा और कुंवर बासित अली (मेरठ) को अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया है।

वीआरएस लेकर आए थे बीजेपी में
गुजरात कैडर में 1988 बैच के आईएएस रहे अरविंद कुमार शर्मा ने इस साल जनवरी में लखनऊ में बीजेपी जॉइन की थी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई। अरविंद कुमार शर्मा पीएम मोदी के नजदीकी लोगों में शुमार हैं। वह एकाएक वीआरएस लेकर यूपी में एमएलसी चुनाव के बीच बीजेपी से जुड़े थे। उन्‍हें बीजेपी ने विधान परिषद का सदस्‍य बनाया।

मऊ के रहने वाले हैं, मोदी संग किया लंबा काम
मूल रूप से मऊ निवासी अरविंद गुजरात में मोदी के सीएम रहते 2001 से 2013 के बीच सीएम कार्यालय में रहे। जब मोदी सीएम रहे तो वह उनके साथ सीएमओ में रहे। नरेंद्र मोदी पीएम बने तो अपने साथ अरविंद कुमार शर्मा को पीएमओ लेकर आ गए। 2014 में वह पीएमओ में संयुक्त सचिव के पद पर रहे। उसके बाद प्रमोशन पाकर सचिव बने।

डेप्युटी सीएम बनाए जाने तक की थी चर्चा
शर्मा के बीजेपी जॉइन करने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि उन्‍हें यूपी का डेप्‍युटी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, अब विधानसभा चुनाव में एक साल ही बचा है। यूपी के सियासी गणित के लिहाज से अरविंद न जातीय समीकरण पर फिट हैं, न उनकी कोई राजनीतिक जमीन है। शर्मा भूमिहार समुदाय से ताल्‍लुक रखते हैं।

एमएसएमई में दी गई थी अहम जिम्मेदारी
कोरोना वायरस संकट की वजह से एमएसएमई (लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम) की स्थिति काफी खराब हो गई थी। एमएसएमई क्षेत्र के लाखों श्रमिकों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो गया। लॉकडाउन के समय पलायन करके लौटे मजदूरों को रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे कठिन समय में पीएम नरेंद्र मोदी ने अरविंद कुमार शर्मा पर एक बार फिर से विश्वास जताया था।