पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

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नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह पश्चिम लागू करे। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद जो हिंसा हुई है उसके लिए निर्देश जारी किया जाए कि अनुच्छेद-356 का इस्तेमाल हो और वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिलसुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता वकील घनश्याम उपाध्याय की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि बीजेपी के सपोर्टरों की हत्या के मामले की एसआईटी से जांच कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि अदालत पश्चिम बंगाल के गवर्नर को निर्देश जारी कर कहें कि वह पश्चिम बंगाल के कानून व्यवस्था की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करें। याची ने कहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है और राज्य में संवैधानिक मशीनरी बिल्कुल फेल हो चुकी है।

16 लोगों की हत्यासुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में ये भी कहा गया है कि मीडिया और न्यूजपेपर की जो रिपोर्ट्स हैं उससे ये बात पब्लिक डोमेन में है कि 16 बीजेपी कार्यकर्ताओं या फिर बीजेपी से सहानुभूति रखने वाले लोगों की हत्या की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये हत्याएं टीएमसी के लोगों द्वारा की गई है। 2021 के विधानसभा चुनाव में जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया है उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया गया है। राजनीतिक पार्टी का इस तरह से जो रवैया है वह तानाशाही वाला रवैया है। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि वह केंद्र सराकर को निर्देश जारी करे कि वह अपनी ड्यूटी पूरा करे और अनुच्छेद-356 का इस्तेमाल किया जाए और राष्ट्रपति को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सलाह दें।

हत्याओं की सीबीआई जांच गौरतलब है कि एक अन्य याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। उस याचिका में पश्चिम बंगाल चुनाव मतगणना के बाद दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई है। याचिका में कहा गया था कि बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार और हरेन अधिकारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद जैसे ही चुनाव परिणाम आया उसके बाद ये हिंसा भड़की थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हत्या के बाद पुलिस ने लचर रवैया अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से उस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा था।