क्या गुजर चुका है कोरोना का पीक या अभी रफ्तार पकड़ेगी लहर? मिल रहे हैं ये संकेत

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नई दिल्‍ली
कोरोना की दूसरी लहर कब थमेगी? नए मामलों की संख्‍या में कब गिरावट आएगी? इस महामारी से कब निजात मिलेगी? देश में अब सभी लोग इन सवालों के जवाब तलाश रहे हैं। इन सवालों के बीच तीसरी लहर की भी चर्चा है। कोरोना की स्थिति को लेकर अलग-अलग तरह के वैज्ञानिक अध्‍ययन और अनुमान भी सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक विश्‍लेषण कैंब्रिज जज बिजनस स्‍कूल और ने किया है। ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्‍होंने एक ट्रैकर विकसित किया है। यह कहता है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का पीक आ चुका है।

बना हुआ है खतरा
शोधकर्ताओं का कहना है कि भले संक्रमण के नए मामले चरम पर पहुंच चुके हैं। लेकिन, अलग-अलग राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ जगह अगले दो हफ्तों में भी मामले बढ़ने के आसार हैं। इनमें असम, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और त्रिपुरा शामिल हैं।

भारतीय एक्‍सपर्ट्स की तर्ज पर हैं अनुमान
कैंब्रिज जज बिजनस स्‍कूल और नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक एंड सोशल रिसर्च के अनुमान कोरोना के सामने आ रहे मामलों पर आधारित हैं। यही नहीं, ये कुछ दूसरे एक्‍सपर्ट्स के अनुमानों से भी मिलते-जुलते हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार भी शामिल हैं।

आंकड़ों में घालमेल
भारत में 7 मई को 4,14,188 नए केस दर्ज किए गए। यह दुनिया के पिछले पीक के मुकाबले करीब 32 गुना ज्‍यादा हैं। लेकिन, यह आंकड़ा बहुत भरोसेमंद नहीं है। कारण है कि भारत में टेस्टिंग बहुत कम है। साथ ही पूरे मामले सामने नहीं आ रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों से संकेत मिलता है कि रोजाना मौतों का आंकड़ा 4,000 के स्‍तर पर बना रह सकता है।

क्‍या कहती है WHO की रिपोर्ट?
(WHO) की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भारत में वायरस के जिस वैरियंट की पहले पहचान हुई थी, उसमें फैलने की दर ज्‍यादा है। शुरुआती संकेत मिलते हैं कि इसने कई एंटीबॉडी की क्षमता घटाई है।

स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर दबाव
बना हुआ है। कई अस्‍पतालों में ऑक्सिजन की किल्‍लत है। राज्‍य दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए उनकी आलोचना हो रही है। केंद्र सरकार भी कटघरे में है। कारोबार ठप्‍प है।

डराने वाली है स्थिति
पिछले 20 दिन से लगातार देश में 3 लाख से ज्‍यादा मामले आ रहे हैं। एक्‍सपर्ट कहते हैं कि मामले तो और ज्‍यादा हों। लेकिन, बड़ी संख्‍या में इनकी गिनती नहीं हो रही है। कई कारणों से कोरोना की दूसरी लहर को हवा मिली है। WHO के अनुसार, इनमें सामूहिक समारोह, चुनावी रैलियां, पाबंदियों में ढील, लोगों का घुलना-मिलना, तीज-त्‍योहार मानना और नियमों की अनदेखी शामिल है।