हर हाल में दिल्ली को रोज दें 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन, केंद्र को SC का निर्देश

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नई दिल्ली
ने केंद्र सरकार से साफ कहा है कि उसे दिल्ली को रोज 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन उपलब्ध कराना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि आप प्लान बताइये कि कहां से और किस तरह से 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की सप्लाई सुनिश्चित होगी। दिल्ली में 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई के मामले में केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है।

केंद्र के अधिकारियों पर अवमानना कार्रवाई पर रोक
केंद्र सरकार की उस अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की जिसमें केंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिकारियों को ऑक्सिजन सप्लाई के मामले में आदेश पालन न होने के मामले में कंटेप्ट नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस ऑर्डर पर रोक लगा दी है जिसमें 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन उपलब्ध कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर अमल नहीं करने पर केंद्र सरकार के अधिकारियों पर अवमानना नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना नोटिस पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई अब गुरुवार को होगी।

हमें लोगों के जीवन को बचाना है: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली में महामारी की स्थिति को देखते हुए पहले से ही आदेश दिया गया था कि 3 मई से दिल्ली में 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की सप्लाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को जेल भेजने से ऑक्सिजन नहीं आएगा। हमें लोगों के जीवन को बचाना है।

सॉलिसिटर जनरल की दलील आई काम
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र और दिल्ली की सरकार चुनी हुई सरकार है और कोविड मरीज को बचाने के लिए अपना बेहतर से बेहतर करने की कोशिश कर रही है। इस समय हम ऑफिसर के खिलाफ कोई कंटेप्ट की कार्रवाई का कारण नहीं समझते। लेकिन हम केंद्र को अवसर देते हैं कि वह बताए कि 700 मीट्रिक टन के टारगेट को वह कैसे पूरा कर रहा है। अदालत ने कहा कि दंडात्मक कार्रवाई की जरूरत नहीं है और कंटेप्ट नहीं होना चाहिए लेकिन हम केंद्र से जवाब चाहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार को मिलकर काम करना होगा। लोगों की जिंदगी बचाना है वह संकट में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र के अधिकारियों को जेल भेजने से फायदा नहीं है। जेल भेजने से ऑक्सीजन नहीं आ आएगी।

केंद्र गुरुवार को समग्र प्लान लेकर आए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार एक समग्र प्लान लेकर आए और चार्ट के साथ दिखाए कि दिल्ली के लिए 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई के आदेश पर किस तरह से अमल होगा। प्लान में बताया जाए कि ऑक्सिजन सप्लाई का स्रोत क्या है, ट्रांसपोर्टेशन कैसे होगा। जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि आगे के आदेश से पहले 30 अप्रैल के आदेश पर अमल करना होगा जिसमें 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन सप्लाई दिल्ली में करने की बात है। केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सिजन सप्लाई का प्लान गुरुवार को पेश करने को कहा है।

अडिशनल सॉलिसिटर जनरल की टिप्पणी पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचू़ड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि अदालत को तमाम स्टेक होल्डरों के माध्यम से समस्या का समाधान करना चाहिए क्योंकि देश महामारी से जूझ रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को निर्देश के मुताबिक हर हाल में रोजाना दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन देना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट में जब सुनवाई शुरू हुई तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि अडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने ऐसा क्यों कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नहीं कहा था कि वह दिल्ली को रोजाना 700 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की सप्लाई करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार के अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं कि सप्लाई हो।

सप्लाई बढ़ी है लेकिन टारगेट 700 मीट्रिक टन का है
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ऑक्सिजन के रिसोर्सेज को मैनेज करने की जरूरत है ताकि दिल्ली के लिए उपलब्धता हो। ये अस्पताल तक सप्लाई चेन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। साथ ही बफर स्टॉक बनाने का भी मुद्दा है। अदालत ने कहा कि ऑक्सिजन की जरूरत को देखा जाए। दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि 28 अप्रैल को दिल्ली को 431 मीट्रिक टन ऑक्सिजन मिला फिर 29 अप्रैल को 409 मीट्रिक टन, 30 अप्रैल को 324 मीट्रिक टन, एक मई को 422 मीट्रिक टन, वहीं दो मई को 447 मीट्रिक टन और तीन मई को 433 मीट्रिक टन और 4 मई को 585 मीट्रिक टन ऑक्सिजन मिली है। ये दिखाता है कि सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है लेकिन टारगेट 700 मीट्रिक टन है।