जिन इलाकों में संक्रमण दर 10 फीसदी से ज्यादा वहां सख्त लॉकडाउन लगाया जाए: डॉ. गुलेरिया

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नई दिल्लीदेश में कोरोनावायरस से बढ़ती मौतों की संख्या के चलते मोदी सरकार पर लॉकडाउन लगाने का दबाव बढ़ रहा है। दो हफ्ते पहले पीएम मोदी ने राज्यों से इसे अंतिम विकल्प के तौर पर चुनने को कहा था। अब राजनीति और बिजनस जगत के लोगों के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार भी कह रहे हैं कि इस महामारी को थामने का यही एकमात्र उपाय है। दरअसल, पिछले साल पूर्व चेतावनी के बिना लॉकडाउन लगाने के फैसले को लेकर पीएम मोदी की काफी आलोचना हुई थी क्योंकि उस समय प्रवासी मजदूरों को पैदल अपने गांव जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। ऐसे में अब तक सरकार इसे टालती आ रही है।

गुलेरिया ने बताया- कहां लगे लॉकडाउन
इस बीच, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मंगलवार को कहा कि जिन इलाकों में कोविड-19 मामलों की संक्रमण दर 10 प्रतिशत से ज्यादा या जहां अस्पतालों में 60 प्रतिशत से ज्यादा बिस्तर भर चुके हों वहां सख्त लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कुछ राज्यों द्वारा कोरोना वायरस मामलों की संख्या कम करने के लिये अपनाई जा रही रात्रि कर्फ्यू और सप्ताहांत लॉकडाउन की रणनीति को खारिज करते हुए कहा कि संक्रमण दर पर इनका ज्यादा प्रभाव नहीं होगा।

गुलेरिया ने कहा कि संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए उन इलाकों में सख्त क्षेत्रीय लॉकडाउन लगाने की आवश्यकता है जहां कोविड-19 मामलों की संक्रमण दर 10 प्रतिशत से ज्यादा है या जहां अस्पतालों में 60 प्रतिशत बिस्तर भर चुके हैं। कोविड-19 कार्यबल भी यही सुझाव दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश में भी है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा।

कैसे रुकेगा कोरोना का कहर
उन्होंने कहा कि एक बार संक्रमण दर घटने के बाद इन इलाकों में क्रमिक तौर पर चरणबद्ध रूप से ‘अनलॉक’ की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च संक्रमण दर वाले इलाकों से लोगों के कम संक्रमण दर वाले इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाई जाए जिससे प्रसार पर अंकुश लग सके।

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन पर उनके विचार पूछे जाने पर गुलेरिया ने कहा कि लोगों की आजीविका और दिहाड़ी मजदूरों पर इसके प्रभाव को देखते हुए संपूर्ण लॉकडाउन समाधान नहीं हो सकता। कम संक्रमण दर वाले इलाकों में पाबंदियों के साथ दैनिक गतिविधियों की इजाजत दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी स्वास्थ्य देखभाल ढांचा इस स्तर पर मामलों का प्रबंधन नहीं कर सकता, इसलिए पर्याप्त समय तक आक्रामक निषेधात्मक उपाय किए जाने चाहिए।

देश में कोरोना के मामले
गुलेरिया की टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब देश कोविड-19 के गंभीर संकट का सामना कर रहा है और संक्रमण के मामलों व मौतों में बढ़ोतरी हो रही है जबकि अस्पतालों में ऑक्सिजन और बिस्तरों की कमी है। भारत में कोविड-19 संक्रमितों की कुल संख्या दो करोड़ के पार पहुंच चुकी है जबकि 50 लाख से ज्यादा मामले महज बीते 15 दिनों में दर्ज किए गए हैं।