सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को झटका, रेरा की जगह ‘हीरा’ कानून असंवैधानिक

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नई दिल्ली/ कोलकाता
से पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा रेरा की जगह बनाए गए अलग कानून को असंवैधानिक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्रीय कानून रेरा की जगह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा रियल एस्टेट एरिया को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए कानून (वेस्ट बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्रीज रेगुलेशन ऐक्ट-2017 यानी हीरा) को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के कानून वेस्ट बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्रीज रेगुलेशन ऐक्ट-2017 यानी हीरा को शून्य करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार का कानून असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि अगर किसी विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है तो राज्य विधानमंडल समान नेचर का कानून नहीं बना सकती है। राज्य सरकार के 2017 यानी हीरा को खारिज करते हुए कहा कि इस कानून के निर्माण में एक सामानांतर तंत्र बनाया गया है और ये असंगत है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-
कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय कानून अगर किसी विषय पर है तो राज्य वैसा कानून नहीं बना सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का कानून केंद्रीय कानून को ओवरलैप यानी अतिक्रमण किया है और इस तरह इस कानून को लागू कर राज्य विधायिका ने पैरलल सिस्टम बनाया और इस तरह से संसद का जो पावर है उसमें दखल दिया है और ये संसद की शक्ति में अतिक्रमण है। देखा जाए तो राज्य का कानून होम बायर्स के हितों को प्रोटेक्ट करने में सफल नहीं रहा और केंद्र के रेरा कानून के खिलाफ ये कानून है।

ऐसी स्थिति में राज्य सरकार का कानून बना नहीं रह सकता और उसे निरस्त किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-142 का अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल किया और कहा कि वेस्ट बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्रीज रेगुलेशन ऐक्ट-2017 यानी हीरा के तहत हाउसिंग प्रॉजेक्ट में पहले दी गई। अनुमति पर फैसले का असर नहीं होगा। वेस्ट बंगाल सरकार के कानून को एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि राज्य के कानून के कारण बायर्स को बड़ी हानि हुई है।