भगवान या शैतान! कोविड मरीजों से बेड के नाम पर डॉक्टर ने घूस लिए ₹3 लाख

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ठाणे
महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रहे करोना वायरस के मामलों से हड़कंप मचा है। मरीजों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे हैं। कई लोग लोगों पर आई इस मुसीबत का फायदा उठाने में लगे हैं। ऐसा ही एक मामला ठाणे से सामने आया है। यहां पुलिस ने म्युनिसिपल कार्पोरेशन से अटैच एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। डॉक्टर पर आरोप है कि उसे दो महीजों को आईसीयू में भर्ती करने के नाम पर घूस ली। दोनों मरीजों से तीन लाख में सौदा तय हुआ था।

मामला ग्लोबल हब कोविड अस्पताल का है। गरुवार को मामले के सामने आने के बाद महापौर नरेश महस्के ने आरोप की जांच का आदेश मनपा प्रशासन को दिया था। इसके बाद मनपा आयुक्त डॉक्टर बिपिन शर्मा के निर्देश पर कापुरबावडी पुलिस स्टेशन में डॉ. परवेज, डॉक्टर नाजनीन, अबिद खान, ताज खान और अब्दुल गफार खान के ख़िलाफ आईपीसी 420,286 तथा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।

एजेंसी के जरिए अपॉइंट किए गए थे डॉक्टर
सभी लोग मेसर्स ओमसाई आरोग्य केयर प्रा.लि. एजेंसी से जुड़े हैं। अस्पताल में डॉक्टर और अन्य स्टाफ की आपूर्ति का ठेका इसी संस्था के पास है। कापुरबावडी पुलिस ने डॉ.परवेज को गिरफ्तार किया है। परवेज को ठाणे न्यायालय में पेश किया गया। उसे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस को लगता है कि परवेज और उससे जुड़े लोगो ने और भी मरीजों को भर्ती करने के लिए इसी तरह रुपये लिए होंगे।

जूनियर डॉक्टरों ने दी यह गवाही
अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर अनंत मांजरेकर, डॉक्टर पल्लवी हावरे, डॉक्टर जेबा बलबले तथा डॉक्टर उमर शेख ने अपने बयान में डॉ. परवेज और सेंटर हेड डॉक्टर नाजनीन के इशारे पर बेड खाली रखने की बात कही है। मनपा के पीआरओ संदीप मालवी से आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की बात पूछे जाने पर उनका कहना था कि मामला दर्ज किया गया है और अब पुलिस अपने हिसाब से आरोपियों के खिलाफ जांच करेगी।

आईसीयू के लिए रुपये मांगने का आरोप
आपको बता दें कि वसई निवासी सचिन बाबर के पिता दिलीप बाबर को गुरुवार को ग्लोबल हब अस्पताल में लाया गया था जहां डेढ़ लाख रुपये देते ही आधे घंटे में दिलीप को आईसीयू में भर्ती कर लिया गया था। मामले के सामने आते ही हड़कंप मच गया था।

स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार आया सामने
इस घटना से टीएमसी के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार सामने आया है। एक पखवाड़े पहले, चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी राजू मुरुडकर को एक निजी फर्म से पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने फर्म से 30 वेंटिलेटर के एक टेंडर को मंजूरी देने के लिए 10 पर्सेंट कमीशन के रूप में 15 लाख रुपये की मांग की थी।