SC में कोरोना केस की सुनवाई से आखिर पीछे क्यों हट गए हरीश साल्वे, जानिए वजह

0
2

नई दिल्ली
देश में कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से प्लान मांगा था। इस मामले में शुक्रवार वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने खुद को केस से अलग करने की अनुमति मांगी। हरीश साल्वे ने कोविड 19 मामले में न्याय मित्र नियुक्त किए जाने पर कहा कि मैं नहीं चाहता कि मामले में फैसले के पीछे यह कहा जाए कि प्रधान न्यायाधीश को मैं जानता हूं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें भी तकलीफ हो रही है कि न्याय मित्र नियुक्त करने पर वकील क्या कह रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने हरीश साल्वे को मामले से हटने की अनुमति दे दी और अब सुनवाई मंगलवार27 अप्रैल को होगी।

लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सबसे पहली टिप्पणी ऑक्सिजन की कमी से अस्पतालों से आ रही मौत की खबरों पर की। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि लोग ऑक्सिजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं।

हरीश साल्वे ने खुद को अलग किया
इस बीच एमिकस क्यूरी (कोर्ट द्वारा नियुक्त वकील) नियुक्त किए गए मशहूर वकील हरीश साल्वे ने खुद को इस केस से अलग कर दिया। साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह इच्छा जाहिर की थी, जिसे मान लिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिस तरह से कुछ वर्चुअल मीडिया प्लेटफॉर्म इस मामले में साल्वे को एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

कल कोर्ट ने क्या-क्या कहा था
भगवान भरोसे है देश: सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह ऑक्सिजन की सप्लाई तथा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं व महामारी के खिलाफ टीकाकरण के तरीके समेत अन्य मुद्दों पर राष्ट्रीय योजना पेश करे। देश की सबसे बड़ी अदालत ने देश में गंभीर होती स्थिति पर जहां स्वतः संज्ञान लिया, वहीं अस्पतालों में ऑक्सिजन सिलेंडर की कमी से टूटे कहर पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि देश भगवान भरोसे चल रहा है।

कोविड-19 प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार के एक दिन बाद न्यायालय ने यह टिप्पणी की। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि सरकार चाह ले तो कुछ भी कर सकती है, यहां तक की ‘धरती को स्वर्ग’ बना सकती है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि वह उच्च न्यायालयों में लंबित कुछ मुद्दों को वापस ले सकती है और खुद उनसे निपटेगी। हालांकि पीठ ने इन न्यायालयों में लंबित मामलों की न तो सुनवाई पर रोक लगाई और न ही इन मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया। इस पीठ में न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति एस आर भट भी शामिल हैं।