महाराष्ट्र, आंध्र, बिहार तड़प रहे और इन राज्यों ने दबा रखा है कोरना वैक्सीन का भंडार

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नई दिल्ली
देश के कुछ राज्यों में वैक्सीन की किल्लत की बातें हो रही हैं तो कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां 20 से 45 दिनों तक का स्टॉक बचा है। स्टॉक में इतना बड़ा अंतर इसलिए भी है क्योंकि कुछ राज्यों में टीकाकरण अभियान की गति तेज है, कुछ राज्यों में औसत तो कुछ राज्यों में धीमी। केंद्र सरकार ने कोरोना के प्रकोप और आबादी को ध्यान में रखकर राज्यों को कोविड वैक्सीन की डिलीवरी की है, लेकिन जो राज्य टीकाकरण अभियान को गंभीरता से ले रहे हैं, वहां कम स्टॉक बचा है। वहीं, जिन राज्यों में टीकाकरण की रफ्तार धीमी है वहां वैक्सीन का बड़ा भंडार बचा हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या बड़े भंडार वाले राज्यों से कुछ टीके किल्लत वाले राज्यों को नहीं दे दिए जाने चाहिए?

इन राज्यों में वैक्सीन की कमी
आंध्र प्रदेश और बिहार की बात करें तो यहां का मौजूदा वैक्सीन स्टॉक दो दिन से भी कम है। वहीं, ओडिशा जैसे राज्यों के पास बड़ी मुश्किल से 4 दिनों का स्टॉक है। आंध्र प्रदेश के पास वैक्सीन के महज 1.4 लाख डोज हैं जो एक दिन से थोड़ा ज्यादा चलेंगे क्योंकि यहां 1अप्रैल से वैक्सीनेशन की 1.1 लाख डोज रोजाना की है। बिहार की भी कमोबेश यही स्थिति है। वहां रोजाना औसतन 1.7 लाख डोज की खपत है जबकि उसके पास महज 2.6 लाख डोज बचे हैं। ऐसे में बिहार में भी वैक्सीनेशन पूरे दो दिन भी नहीं चल पाएगा।

पूरे देश का क्या हाल?
पूरे देश की बात करें तो अप्रैल में रोजाना वैक्सीनेशन की दर करीब 3.6 मिलियन डोज प्रतिदिन की रही है। इस हिसाब से वैक्सीन का टोटल स्टॉक 1.96 करोड़ अगले 5.5 दिनों तक ही चल पाएगा। इसके अलावा वैक्सीन की 2.45 करोड़ डोज पाइपलाइन में हैं जो अन्य एक हफ्ते के लिए पर्याप्त होगी, लेकिन अगर वैक्सीनेशन की स्पीड को एक स्टेप भी आगे बढ़ाया गया तो मौजूदा और आने वाला स्टॉक दोनों समाप्त हो जाएगा।

बड़े भंडार वाले हैं ये राज्य
तमिलनाडु के पास 16,70,760 डोज बची है और जिस रफ्तार से वहां टीकाकरण हो रहा है, उसके लिहाज से इतनी डोज अगले करीब 45 दिनों तक के लिए पर्याप्त है। इसी तरह, गोवा के पास 1,50,180 डोज बची है जो उसकी रफ्तार के लिहाज से 23 दिन से भी ज्यादा तक टीकाकरण के लिए पर्याप्त है। कुछ ऐसा ही हाल चंडीगढ़ का है। वहां भी 21 दिन से ज्यादा का टीका बचा है। वहीं, तेलंगाना और केरल में 13-13 दिन से ज्यादा और हरियाणा में 12 से ज्यादा दिन का टीका बचा हुआ है।

क्यों कम पड़ रही है वैक्सीन?
अब अगर सबसे कम भंडार वाले राज्यों पर नजर डालें तो आंध्र प्रदेश और बिहार की हालत सबसे ज्यादा खस्ता है। यहां दो दिन से भी कम का भंडार बचा है। उत्तर प्रदेश (2.5 दिन), उत्तराखंड (2.9 दिन), ओडिशा (3.2 दिन) और मध्य प्रदेश (3.5 दिन) उन राज्यों में शामिल हैं जहां 4 दिन से भी कम का स्टॉक बचा है। हालांकि, यह ध्यान रहे कि आंकड़े गुरुवार 8 अप्रैल के दिन के 12.30 बजे के ही हैं। यानी, इन राज्यों में अगर आज वैक्सीन की नई खेप नहीं पहुंची तो किल्लत होनी तय है। महाराष्ट्र में तो आज 50 से ज्यादा टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ गया है। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र को कम वैक्सीन सप्लाई की गई है। राजस्थान और गुजरात के साथ महाराष्ट्र ही उन तीन राज्यों में शामिल है जिन्हें 10 करोड़ से ज्यादा डोज की सप्लाई हो चुकी है।

तो सवाल उठता है कि आखिर महाराष्ट्र को वैक्सीन की किल्लत क्यों हो गई है? दरअसल, प्रदेश में कोविड-19 महामारी के खौफनाक स्तर पर पहुंच जाने के कारण महाराष्ट्र सरकार टीकाकरण अभियान को काफी जोर-शोर से चला रही है। वहां, 1 अप्रैल से औसतन 3,91,460 डोज खर्च हो रही है। इस कारण उसके पास 15 लाख से ज्यादा बची डोज भी अगले चार दिनों के लिहाज से भी पर्याप्त नहीं है। चूंकि पूरे राज्य में वैक्सीन का समान बंटवारा नहीं हो पाया है, इसलिए कुछ केंद्रों पर टीकाकरण को रोकना पड़ गया है।

क्या कर रही है सरकार?
बहरहाल, वैक्सीन की किल्लत नहीं हो, इसके लिए क्या तमिलनाडु, गोवा, चंडीगढ़, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में पड़े भंडार से कुछ टीके निकालकर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों को भेजना सही रहेगा? पता नहीं, सरकार इस बारे में विचार कर रही है या करेगी भी कि नहीं, लेकिन इतना तो जरूर है कि वैक्सीन की किल्लत नहीं हो, इसे लेकर वो गंभीर जरूर है। यही वजह है कि सरकार ने देश में कोविड वैक्सीन की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के तरीके ढूंढने के लिए अंतर-मंत्रालयीय समूह (Inter-Ministerial Group) का गठन किया है। इस समूह ने भारत बायोटेक के हैदराबाद और बेंगलुरु स्थित संयंत्रों का दौरा किया और यह समझने की कोशिश की कि आखिर इन दोनों प्लांट्स में टीके की उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सके।

कोवैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
उधर, भारत बायोटेक ने भारत सरकार के बायोटेक्नॉलजी डिपार्टमेंट को चिट्ठी लिखकर अतिरिक्त फंड मुहैया कराने की मांग की है। कंपनी ने कहा कि अभी वह हर महीने की 50 लाख डोज तैयार कर पा रही है, लेकिन अगर उसे 150 करोड़ रुपये मिल जाएं तो उसकी उत्पादन क्षमता 5 से 7 गुना बढ़ सकती है। उसकी योजना है कि अगर दोनों प्लांट के लिए 75-75 करोड़ रुपये मिल जाएं तो जानवरों के लिए टीके का उत्पादन कुछ समय तक रोककर कोरोना वैक्सीन का उत्पादन बढ़ा दिया जाएगा।

अंतर-मंत्रालयीय समूह के सदस्यों में से एक ने कहा कि भारत में सालाना टीका उत्पादन क्षमता 2 से 2.5 अरब डोज करने की संभावना तलाशी जा रही है। उन्होंने कहा, “वैक्सीन निर्माताओं से उत्पादन बढ़ाने को कहा या है। इस वर्ष के उत्तरार्ध में (जून से दिसंबर तक) सालानी उत्पादन क्षमता बढ़कर 2 से 2.5 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य है।”