जजों की नियुक्ति पर कलीजियम की सिफारिशें सरकार के पास पेंडिंग, SC नाराज

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नई दिल्ली
ने हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए कलीजियम ने जो सिफारिश की है, उस पर सरकार द्वारा फैसला लेने में छह महीने से ज्यादा की देरी पर चिंता जताते हुए कहा है कि कलीजियम द्वारा भेजे गए नामों पर एक समय के भीतर विचार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि टाइमबाउंड तरीके से कलीजियम द्वारा भेजे गए नाम पर विचार होना चाहिए।

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि जिन नामों को कलीजियम ने मंजूरी दी और सरकार को सिफारिश की है वे नाम लॉ मिनिस्ट्री के पास छह महीने से ज्यादा समय से पेंडिंग है। हाई कोर्ट ने 45 नाम भेजे हैं लेकिन इन्हें सुप्रीम कोर्ट कलीजियम के पास नहीं भेजा गया है।

कई नाम ऐसे भी हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट कलीजियम से मंजूरी के बाद उनकी नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने सिफारिश भी कर दी है, लेकिन सरकार के पास छह महीने से ज्यादा वक्त से वे मामले पेंडिंग हैं और सरकार ने मंजूरी नहीं प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा है कि वह इस बात से कोर्ट को अवगत कराएं कि कलीजियम ने जो सिफारिशें भेजी है, वह किस स्थिति में है।

सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के प्रेसिडेंट और सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि जो वकील सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं, उन्हें हाई कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्ति के लिए विचार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे नामों को हाई कोर्ट ने जब सिफारिश की है तो हाई कोर्ट बार असोसिशएन का विरोध होता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में एनजीओ लोकप्रहरी की ओर से अर्जी दाखिल की गई है और कहा गया है कि हाई कोर्ट के जजों के खाली पद को भरने की गुहार लगाई है। देश भर के तमाम हाई कोर्ट में अभी 1080 पद में 419 खाली हैं। 27 जनवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में देश भर के हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर मामले की सुनवाई चल रही थी, तब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि संवैधानिक कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए जब सुप्रीम कोर्ट कलीजियम सिफारिश करती है तो केंंद्र सरकार एक टाइम फ्रेम में उस पर फैसला लेना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी में कहा था कि अगर आप नाम वापस कते हैं तो या तो हम दोबारा नाम भेजें या फिर आप अपने ऐतराज बताएं लेकिन अगर आप महीनों सिफारिश किए गए नामों पर चुप रहेंगे तो फिर ये गंभीर मसला है।