राउत बिफरे- कल तक भरोसा नहीं था, आज विपक्ष का सबसे जरूरी हथियार बन गए परमबीर

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मुंबई
महाराष्‍ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार इनदिनों अपने सबसे मुश्किल दौर (Maharashtra Politics Crirsis) से गुजर रही है। मुंबई के कमिश्‍नर पद से हटाए गए अफसर परमबीर सिंह ने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप लगाकर राजनीतिक भूचाल खड़ा कर दिया है। पूरी उद्धव सरकार देशमुख के बचाव में उतर आई है। एनसीपी चीफ ने जहां प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर देशमुख को पद से हटाने से इनकार कर दिया है, वहीं, शिवसेना प्रवक्‍ता संजय राउत विपक्षी दलों पर वार करते नजर आ रहे हैं। संजय राउत का कहना है कि परमबीर सिंह इस समय विपक्षी दलों के लिए सबसे जरूरी हथियार बन चुके हैं।

गौरतलब है कि बीजेपी लगातार अनिल देशमुख को पद से हटाने के साथ ही उनका और मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे का नार्को टेस्‍ट कराने की मांग कर रही है। इस पर संजय राउत का कहना है कि अगर एनसीपी यह महसूस करती है कि अनिल देशमुख पर लगे आरोपों को लेकर कोई सुबूत नहीं है तो इसमें गलत क्‍या है। राउत ने कहा कि अगर महाराष्‍ट्र सरकार इस पूरे मामले की जांच कराने की चुनौती स्‍वीकार कर रही है तो समस्‍या कहां पर है।

‘कंगना और सुंशात केस में परमबीर पर विपक्ष ने की थी टिप्‍पणी ‘
संजय राउत ने कहा कि पूर्व पुलिस कमिश्‍नर ने सीएम ऑफिस को जो पत्र भेजा है, उसमें सिर्फ अनिल देशमुख पर आरोप लगाए गए हैं, कोई सबूत नहीं दिया गया है। राउत ने कहा कि कल तक विपक्ष के नेता परमबीर सिंह पर विश्‍वास तक नहीं करते थे पर आज वह उनके लिए जरूरी हथियार बन चुके हैं। कंगना रनौत और सुशांत सिंह राजपूत केस में विपक्ष ने परमबीर सिंह के खिलाफ टिप्‍पणी की थी पर आज वह उन्‍हीं नेताओं के सबसे भरोसेमंद अफसर बन चुके हैं। अगर विपक्ष परमबीर सिंह के कंधे का प्रयोग कर महाराष्‍ट्र सरकार को आग में झुलसाने की कोशिश करेंगे तो वह खुद जल जाएंगे।

राष्‍ट्रपति शासन पर ये बोले राउत
बीजेपी की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी के अध्‍यक्ष रामदास आठवले ने महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र भेजा है। इस बारे में संजय राउत का कहना है कि महाराष्‍ट्र की बजाय केंद्र सरकार को ही हटा देना चाहिए क्‍योंकि एजेंसियों के जरिये यह राज्‍य के अधिकारों में अतिक्रमण है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके हैं परमबीर सिंह
गौरतलब है कि सीएम उद्धव ठाकरे को लिखे अपने पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में परबीर ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने और खुद के ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक की मांग की है। परमबीर ने कोर्ट से गृह मंत्री अनिल देशमुख के घर का सीसीटीवी फुटेज जब्त करने की भी मांग की है।

शरद पवार ने किया अपने मंत्री का बचाव
इससे पहले सुबह, प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने फिर अनिल देशमुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि फरवरी महीने में देशमुख अस्पाल में भर्ती थे। ऐसे में फरवरी में देशमुख और सचिन वझे के बीच बातचीत का आरोप गलत है। पवार ने इस दौरान देशमुख के अस्पताल में भर्ती होने का पर्चा भी दिखाया। उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते 5 से 15 तक वह नागपुर के अस्पताल में भर्ती थे। उसके बाद 16 फरवरी से 27 फरवरी तक वह होम आइसोलेट थे। उन्होंने कहा कि यह साफ है कि आरोप गलत हैं, ऐसे में अनिल देशमुख के इस्तीफे का सवाल नहीं उठता। परमबीर सिंह के आरोपों से महाविकास अघाडी सरकार पर कुछ असर नहीं पड़ेगा।