‘लॉकडाउन समाधान नहीं, 20 से 45 साल के लोग सुपर स्प्रेडर… इनका भी शुरू हो वैक्सीनेशन’

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नई दिल्ली
आज से ठीक एक साल पहले पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। देशभर में एक अजीब सा माहौल बन गया था। हर तरफ वीरानी, सुनसान सड़कें और एक अजब सी उदासी का ही पहरा था। कोरोना वायरस देश के कोने-कोने तक फैल चुका था। न तो इस बीमारी के बारे में किसी को जानकारी थी और न ही हमारे पास संसाधन थे। हमारे पास न तो पीपीई किट थी, न ही कोई दवा जिससे इस महामारी पर काबू पाया जा सके। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में कार्डियक सर्जन और नारायणा हेल्थ के अध्यक्ष और संस्थापक देवी शेट्टी ने एक लेख में लिखा है कि अब लॉकडाउन की जरूरत नहीं बल्कि जरूरत है कि 20 से 45 साल के लोगों को टीका लगाया जाए।

एक साल पहले का दिन याद है…शेट्टी ने अपने लेख में एक साल पहले के सीन को याद करते हुए लिखा कि देश में कोरोना वायरस लगातार बढ़ता जा रहा था और डॉक्टर इस खोज में लगे थे कि कैसे इसको रोका जाए। सैकड़ों की संख्या में डॉक्टर भी कोरोना से संक्रमित हो गए और कई डॉक्टर समेत हेल्थ वर्करों की मौत भी हो गई। चीन में पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया था। भारत ने पड़ोसी देशों से पीपीई किट मंगाई ताकि अपने डॉक्टरों को सुरक्षित किया जा सके। लॉकडाउन के समय देश की सरकार ने कोविड 19 से निपटने के सारे इंतजाम किए और फिर तेजी से इलाज शुरू हुआ।

भारत ने संभाली कमानपूरे विश्व में कोरोना वायरस भंयकर फैला हुआ था। जो देश अपने आपको विकसित और मेडिकल के क्षेत्र में नंबर वन समझते थे उन्होंने भी इस वायरस के आगे घुटने टेक दिए मगर भारत ने इसका डटकर मुकाबला किया और जीत भी मिली। पूरे विश्व के मुकाबले भारत में सबसे कम मृत्युदर रही। बाकी अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, इटली, ब्राजील समेत तमाम देशों की हालत बदतर हो चुकी थी।

मास्क से बहुत हद तक वायरस का संक्रमण रुकता है
डॉ. शेट्टी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पश्चिमी डॉक्टरों के अनुभव से हमने सीखा कि ऑक्सीजन और स्टेरॉयड वेंटिलेटर की तुलना में अधिक उपयोगी हैं। हमने सीखा कि हल्के लक्षणों वाले कोविड पॉजिटिव रोगियों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात जो हमें पता चली कि यदि 70% जनता फेस मास्क ठीक से और लगातार पहनती है तो वायरस फैलना बंद कर देगा।

जल्द से जल्द वैक्सीनेशनडॉ शेट्टी ने कहा कि आज कोरोना वायरस फिर तेजी से बढ़ता जा रहा है। पिछले साल की संख्या के आधार पर अगले कुछ हफ्तों में बेंगलुरु में कोविड -19 की पॉजिटिविटी रेट 24% को छू सकती है। जब ऐसा होता है हम केवल बेंगलुरु अस्पताल में लगभग 500 कोविड रोगियों की उम्मीद कर सकते हैं। यह दो महीने तक जारी रहेगा और पूरे देश में दसियों हजार लोगों की बाढ़ अस्पतालों को भर देंगे। सरकार पर कुछ करने का भारी दबाव होगा और वे लॉकडाउन का आसान विकल्प चुन सकते हैं लेकिन इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं। लाखों लोग बेघर हो गए। इससे अच्छा है कि हम लोग कोरोना गाइडलाइंस को फॉलो करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 99 फीसदी लोगों को पता है कि मास्क से कोरोना संक्रमण रुकता है लेकिन केवल 44 फीसदी लोग ही मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। क्योंकि मास्क से लोगों को गर्मी और उलझन महसूस होती है।

दिल्ली में भी तेजी से फैलेगा कोरोनाउन्होंने कहा कि केरल और महाराष्ट्र में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। जबकि कर्नाटक और दिल्ली में भी आने वाले कुछ सप्ताह में मरीज तेजी से बढ़ेंगे। लेकिन कर्नाटक ने कोरोना के खासे इंतजाम किए हैं जोकि बहुत अच्छे हैं। वह हर हालात से निपटने में सक्षम प्रदेश है। विदेशी मीडिया ने भारत को भयंकर परिणाम भुगतने जैसी तमाम रिपोर्ट प्रकाशित कीं लेकिन हम सौभाग्यशाली हैं कि सबसे पहले हमारे पास वैक्सीन आ गई।

20-45 साल के लोगों को वैक्सीनेशन उन्होंने आगे कहा कि एक अच्छा मौका है कि हम अगले छह महीनों के भीतर महामारी को रोक सकते हैं यदि हम युद्धस्तर पर बड़े पैमाने पर टीकाकरण करते हैं। उन्होंने कहा कि 20 से 45 वर्ष के बीच के लोगों के टीकाकरण पर अब जोर देना चाहिए क्योंकि इन्हीं एज ग्रुप के लोग असली सुपर स्प्रेडर हैं। हम अपनी राज्य सरकारों से इस विदेशी वायरस से छिपने और इस चुनौती को पार करने के बजाय अपने लोगों की ताकत पर भरोसा करने का आग्रह करते हैं।