किशोर ने नाबालिग से बनाए शारीरिक संबंध, शादी, 6 माह का शिशु…. कोर्ट बोला- तीन जिंदगियां खराब हो जाएंगी

0
7

प्रणय राज, नालंदा
बिहारशरीफ में किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्रा ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। नाबालिग लड़की को भगा कर शादी करने और शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी किशोर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य थे। बावजूद इसके कोर्ट ने किशोर को दोष मुक्त करते हुए नाबालिग पति-पत्नी को साथ रहने का फैसला सुनाया। ताकि उनके छह माह के नवजात शिशु का पालन पोषण प्रभावित ना हो मानवेंद्र मिश्रा ने कहा कि सजा देने से तीन नाबालिग जिंदगी प्रभावित होंगी।।

क्या था मामला
हिलसा थाना इलाके के एक गांव की है। जहां सरस्वती पूजा में शामिल होने गई किशोरी अपने प्रेमी के साथ फरार हो गयी थी। इसके बाद किशोरी के पिता ने 11 फरवरी 2019 को गांव के ही एक किशोर पर अपहरण का मामला हिलसा थाने में दर्ज कराया था। इधर गांव से भागकर दोनों दिल्ली चल गए थे। जहां आरोपी ने नाबालिग लड़की के साथ शादी कर ली। दोनों का एक 6 माह का बच्चा हो गया। तबतक किशोर अपनी मौसी के यहां रह रहा था। इसी बीच उसे पता चला कि किशोरी के पिता ने थाने में मामला दर्ज कराया है। इसके बाद वह गांव लौट आया। गांव लौटने की सूचना मिलते ही पुलिस आरोपी किशोर को न्यायालय के सुपुर्द किया, जहां से उसे सेफ्टी होम शेखपुरा भेज दिया गया।

ट्रायल के 3 दिन के भीतर फैसला सुनाया: अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमारकिशोर अभी वह सेफ्टी होम में ही रह रहा है। पास्को कोर्ट से यह मामला 19 मार्च 2021 को किशोर न्याय परिषद पहुंचा। जहां तीन जिंदगियों को देखते हुए महज 3 दिन में ही जज मानवेंद्र मिश्र ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जबकि लड़की को भगाकर ले जाने और शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में किशोर को सजा हो सकती थी।

किशोर न्याय परिषद के सदस्य अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि किशोर और लड़की दोनों नाबालिग हैं। उनके एक बच्चा है। कोर्ट में मामला आने पर दोनों परिवार एक दूसरे को अपनाने पर तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल का यह सबसे कम दिन में सुनाया गया फैसला है। अब तक भारत के किसी भी न्यायालय में ट्रायल के 3 दिन के भीतर फैसला नहीं सुनाया गया है।

सुना चुके हैं कई ऐतिहासिक फैसला
जज मानवेंद्र मिश्र अब तक कई ऐतिहासिक फैसले सुना चुके हैं। इसके पहले उन्होंने 26 फरवरी 21 को नूरसराय थाना इलाके के एक गांव का इसी तरह का फैसला सुनाया था। जबकि दारोगा और पुलिस में नौकरी लगने वाले आरोपी किशोर को आरोप से बरी कर दिया था।