प्रो. प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे पर नहीं थम रहा बवाल, जानें क्या है अशोका यूनिवर्सिटी का पूरा मामला

0
11

नई दिल्ली
अशोका यूनिवर्सिटी से दो मशहूर प्रोफेसर के इस्तीफे का मामला काफी सुर्खियों में है। यूनिवर्सिटी से इस्तीफा देने वालों में प्रो. प्रताप भानु मेहता और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मणयन शामिल हैं। दरअसल, प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे के दो दिन बाद ही उनके समर्थन में देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरविंद सुब्रह्मणयन ने भी इस्तीफा दे दिया। इस पूरे मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा जा रहा है। प्रोफेसर्स के इस्तीफे के बाद यहां के स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के विरोध में उतर गए हैं। यूनिवर्सिटी की बाकि फैकल्टी भी प्रो. मेहता के समर्थन में आ गई है। वहीं, कांग्रेस ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए इसे राजनीति से जोड़ दिया है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

सवाल : प्रो. प्रताप भानु मेहता के अशोका यूनिवर्सिटी से इस्तीफे की वजह क्या है?

जवाब : दरअसल प्रताप भानु मेहता एक स्तंभकार भी हैं। वह अपने रेगुलर कॉलम में सरकार की नीतियों पर समय-समय पर सवाल उठाते रहते हैं। प्रो. मेहता ने कई मुद्दों पर खुलकर मोदी सरकार की आलोचना भी की है। बताया जा रहा है कि सरकार की नीतियों की आलोचना की वजह से ही उन्होंने इस्तीफा दिया है।

सवाल : प्रो. मेहता ने अपने इस्तीफे में क्या लिखा?

जवाब : प्रताप भानु मेहता ने लिखा, फाउंडर्स से मिलने के बाद ऐसा लगता है कि मेरा यूनिवर्सिटी से जुड़े रहना पॉलिटिकल लायबिलिटी समझा जा सकता है। ऐसे में आजादी और समान अधिकारों वाले संवैधानिक मुद्दों के पक्ष में लिखना विश्वविद्यालय के लिए खतरा हो सकता है।

सवाल : प्रो. प्रताप भानु मेहता अशोका यूनिवर्सिटी से कब जुड़े थे?

जवाब : प्रो. मेहता साल 2017 में कुलपति के रूप में अशोका यूनिवर्सिटी जॉइन किया था। दो साल बाद में उन्होंने कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन वह यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर के रूप में जुड़े हुए थे। इससे पहले वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, एनवाईयू लॉ स्कूल में ग्लोबल फैकल्टी प्रोग्राम में प्रोफेसर रह चुके हैं। वह सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मेहता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट हैं। उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से राजनीति में पीएचडी की है।

सवाल : इस मामले में कांग्रेस का क्या रुख है?

जवाब : कांग्रेस इस पूरे मामले में मोदी सरकार पर आक्रामक हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर को इस तरह से इस्तीफा देना पड़ता है तो देश में एकेडमिक फ्रीडम के बारे में क्या कहा जाएगा। चिदंबरम ने कहा कि लोगों को ‘एक विचारधारा थोपे जाने’ के खिलाफ खड़े होना चाहिए। उन्होंने लोगों से इससे प्रतिरोध करने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘भाजपा की विचारधारा’ भारत को बर्बाद कर देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधार इसे तानाशाही में तब्दील कर देगी।

सवाल : इस मामले पर भाजपा ने क्या कहा?

जवाब : भाजपा ने साफ किया है कि सरकार का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। भाजपा नेता विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि यह निजी विश्वविद्यालय का अंदरुनी मामला है। सरकार का इससे दूर-दूर तक लेना देना नहीं है। भाजपा नेता ने कहा कि वो विश्वविद्याल सरकार पोषित संस्थान भी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार वहां का वीसी भी नियुक्त नहीं करती है।

सवाल : पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मणयन ने इस्तीफे के पीछे क्या वजह बताई?

जवाब : अपने इस्तीफे में प्रो. अरविंद सुब्रह्मणयन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि प्रो. मेहता एक दोस्त ही नहीं एक प्रेरक व्यक्ति भी हैं। उनके इस्तीफे ने मुझे बुरी तरह से हिला दिया है। मैं अशोका यूनिवर्सिटी को चलाने वाले ट्रस्टीज की समस्या को समझ सकता हूं। मुझे अब तक उनसे कोई समस्या नहीं रही। लेकिन प्रताप मेहता जैसे दिग्गजों को अगर यूनिवर्सिटीज छोड़ने का फैसला लेना पड़े तो ये बात डिस्टर्ब करती है। सुब्रमण्यन ने अपने इस्तीफे में यहां तक कहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी होने और प्राइवेट पूंजी से चलने के बावजूद अशोका अकादमिक अभिव्यक्ति और आजादी के लिए जगह नहीं दिला पाई, जो काफी डिस्टर्ब करने वाला है। सुब्रमण्यन ने पिछले साल जुलाई में डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक्स में बतौर प्रोफेसर जॉइन किया था।

सवाल : अशोका यूनिवर्सिटी के छात्रों की क्या मांग है?

जवाब : प्रो. मेहता के इस्तीफे लेकर छात्र यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि प्रो. मेहता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। प्रो. मेहता और सुब्रह्मणयन को उनके पद वापस ऑफर किए जाएं। छात्रों की दूसरी मांग है कि यूनिवर्सिटी के संस्थापक बताए की प्रोफेसर और उनके बीच क्या बातचीत हो रही है। तीसरी मांग संस्थान में सुधार लाने की है जिससे कि भविष्य में इस तरह की घटना दुबारा ना हो।

सवाल : इस मामले में पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन क्या बोले?

जवाब : भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी अशोक विश्वविद्यालय की आत्मा है, लेकिन क्या अपनी आत्मा को बेचने से ‘दबाव समाप्त हो जाएगा।’ लिंक्डइन’ पर पोस्ट में राजन ने कहा कि भारत में इस सप्ताह अभिव्यक्ति की आजादी को गंभीर झटका लगा है। राजन ने कहा, ”सचाई यह है कि प्रोफेसर मेहता किसी संस्थान के लिए ‘कांटा’ थे। वह कोई साधारण कांटा नहीं हैं, बल्कि वह सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए अपनी जबर्दस्त दलीलों से कांटा बने हुए थे।”

सवाल : इस मामले में देश से बाहर भी कोई रिएक्शन देखने को मिला है?

जवाब : हां, प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे के बाद दुनियाभर के 150 से ज्यादा अकैडमीशियन उनके समर्थन में आगे आए हैं। ये अकैडमीशियन कोलंबिया, येल, हार्वर्ड, प्रिंसटन, ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसी जानी-मानी इंटरनेशन यूनिवर्सिटीज से जुड़े हुए हैं। एक ओपन लेटर के जरिये इन लोगों का कहना है कि अशोका यूनिवर्सिटी से राजनीतिक दबाव” के तहत मेहता के बाहर निकलने के बारे में जानकार “व्यथित” हैं। लेटर में लिखा गया है कि मौजूदा भारत सरकार के एक प्रमुख आलोचक और अकादमिक स्वतंत्रता के रक्षक, वह अपने लेखन के लिए एक टारगेट बन गए थे। ऐसा लगता है कि अशोका के ट्रस्टी, जिनको अपने संस्थागत कर्तव्य के रूप में उनका (प्रो. प्रताप भानु मेहता का) बचाव करना चाहिए था, इसके बजाए उनके इस्तीफे के लिए दबाव बनाया गया।

सवाल : इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी का क्या रुख है?

जवाब : पीबी मेहता की तरफ से सरकार की आलोचनाओं और उनके इस्तीफे के बीच किसी भी तरह के संबंध को लेकर यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यूनिवर्सिटी ने इस मामले में खुद को अलग कर लिया। यूनिवर्सिटी के संस्थापकों की तरफ से भी इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

सवाल : अशोका यूनिवर्सिटी कहां स्थित है?

जवाब : अशोका विश्वविद्यालय हरियाणा के सोनीपत में स्थित है। यह एक प्राइवेट लिबरल आर्ट्स यूनिवर्सिटी है। यूनिवर्सिटी खुद को ‘दुनिया में सबसे अच्छी उदार शिक्षा उपलब्ध कराने में अग्रणी मानती है।