सरकार की आलोचना के चलते इस प्रोफेसर की विदाई? अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे से उठे सवाल

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नई दिल्ली
अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे के 2 दिन बाद ही जाने-माने अर्थशास्त्री और मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रोफेसर मेहता के यूनिवर्सिटी छोड़ने के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों पर ‘क्षोभ’ जताया है। सुब्रमण्यन ने अपने इस्तीफे में यहां तक कहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी होने और प्राइवेट पूंजी से चलने के बावजूद अशोका अकादमिक अभिव्यक्ति और आजादी के लिए जगह नहीं दिला पाई, जो काफी डिस्टर्ब करने वाला है। उनके इस्तीफे के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या प्रताप भानु मेहता को सरकार की आलोचनाओं की वजह से अशोका यूनिवर्सिटी छोड़नी पड़ी है।

मेहता का इस्तीफे के लिए मजबूर होना देखना परेशान करने वाला: सुब्रमण्यन
इंडियन एक्सप्रेस ने अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे का पूरा मजमून छापा है जो अशोका यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर मालाबिका सरकार को भेजा गया है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र के खात्मे के साथ ही उनका इस्तीफा प्रभावी हो जाएगा। अपने इस्तीफे में सुब्रमण्यन ने लिखा है कि प्रताप भानु मेहता जैसी निष्ठा और प्रतिष्ठा वाले शख्स को यूनिवर्सिटी छोड़ने के लिए मजबूर होना परेशान करने वाली बात है। उन्होंने लिखा है कि अशोका का विज़न अब सवालों के घेरे में है, ऐसे में उनके लिए इसका हिस्सा बने रहना मुश्किल है। सुब्रमण्यन ने पिछले साल जुलाई में डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक्स में बतौर प्रोफेसर जॉइन किया था। उनका इस्तीफा अशोका यूनिवर्सिटी के लिए निश्चित तौर पर एक तगड़े झटके की तरह है।

क्या सरकार की आलोचनाओं के चलते इस्तीफा? यूनिवर्सिटी ने नहीं दिया जवाब
दूसरी तरफ, जब इंडियन एक्सप्रेस ने अशोका यूनिवर्सिटी से पूछा कि क्या पीबी मेहता की तरफ से सरकार की आलोचनाओं और उनके इस्तीफे के बीच कोई रिश्ता है तो यूनिवर्सिटी ने इससे खुद को अलग कर लिया। हालांकि, अब अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे से सवाल उठने लगा है कि क्या मेहता को सरकार की आलोचना की वजह से अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

सरकार के खिलाफ बेबाकी से लिखते रहे हैं मेहता
प्रतापभानु मेहता जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और स्कॉलर हैं। वह अखबारों में नियमित तौर पर कॉलम लिखते रहे हैं। मेहता अपने लेखों में बेबाकी से सरकार की नीतियों की आलोचनाएं करते रहे हैं। 2 साल पहले वह अशोका यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पद से भी इस्तीफा दे चुके हैं। तब उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारी की वजह से अपने शैक्षणिक जीवन के प्रभावित होने का हवाला दिया था। हालांकि, वह बतौर प्रोफेसर यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।