जी-23 के लोग चिट्ठी लिखने वाले जरूर हैं, लेकिन जी हुजूरी करने वाले नहीं हैं: सिब्बल

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के सीनियर लीडर और जी-23 के अहम सदस्य का कहना है बीजेपी सरकार पूरे देश में भय का माहौल बना रही है और अपनी आर्थिक शक्ति के बल पर अपना विस्तार कर रही है। जब उनसे सवाल हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस कमजोर क्यों हुई, तो उन्होंने कहा कि अभी पांच राज्यों के चुनाव हो रहे हैं और यह वक्त टीका- टिप्पणी का नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वक्त में उचित फैसले लिए जाएंगे। कांग्रेस में चल रही उठापटक पर एनबीटी नैशनल ब्यूरो की विशेष संवाददाता
मंजरी चतुर्वेदी ने कपिल सिब्बल से बात की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश :

कांग्रेस के जी-23 में वही सारे लोग हैं जो कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान अहम पदों पर रहे हैं। अगर कांग्रेस कमजोर हुई है तो वे उसकी नैतिक जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते?
मुझे नहीं पता कि जी-23 क्या है।

यह उन नेताओं का समूह है, जिसमें आप भी शामिल हैं। इसी समूह ने पिछले साल सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की वकालत की थी?
जी-23 तो मीडिया का दिया नाम है। उन्हें आप चिट्ठी लिखने वाले कह सकते हैं। इतना जरूर कहूंगा कि आप जिन्हें जी-23 कहते हैं, वे कांग्रेसी हैं, लेकिन जी हुजूरी करने वाले नहीं। और ये सिर्फ 23 नहीं हैं, इनकी तादाद बहुत ज्यादा है। हम सब कांग्रेसी हैं और कांग्रेस के संगठन को मजबूत करना चाहते हैं। उन्हीं नीतियों को अपनाना चाहते हैं, जिनके बल पर कांग्रेस सालों तक सत्ता में रही। हम पहले भी कांग्रेस की मजबूती चाहते थे, आज भी चाहते हैं और आगे भी चाहेंगे।

लेकिन क्या यह सच नहीं है कि इन चिट्ठी लिखने वालों के लिए कांग्रेस जब तक सत्ता में रही, तब तक सोनिया और राहुल अतुलनीय रहे? पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद अब संघर्ष के समय में ठीकरा गांधी परिवार पर फोड़कर वे बचने की कोशिश कर रहे हैं?
मैंने पहले भी कहा कि यह वक्त इन सब बातों का नहीं है। बात किसी एक व्यक्ति या नेतृत्व की नहीं, कांग्रेस पार्टी की हो रही है। जो भी कांग्रेस से जुड़ा हुआ है, फिर चाहे पार्टी के बड़े नेता हों, मध्यम स्तर के नेता हों या फिर आम कार्यकर्ता, सबको कांग्रेस को मजबूत करना चाहिए।

कांग्रेस 2014 और उसके बाद 2019 में हारी है। लेकिन गुलाम नबी आजाद को तभी यह क्यों लगा कि कांग्रेस कमजोर हुई है, जब राज्यसभा में उन्हें फिर से न भेजने का फैसला हुआ?
यह आरोप न सिर्फ गलत है, बल्कि तकलीफदेह भी है। आजाद साहब तो केवल एक व्यक्ति हैं। चिठ्ठी अकेले उन्होंने नहीं, बल्कि कई लोगों ने मिलकर लिखी थी। उनमें से कई लोकसभा के भी सदस्य हैं। शशि थरूर या मनीष तिवारी का कार्यकाल तो अभी खत्म नहीं हो रहा। राज्यसभा में मेरा और आनंद शर्मा का कार्यकाल भी बाकी है। जिन्हें यह लगता है कि यह सब हम अपने लिए कर रहे हैं, उन्हें अपने मन से यह शंका निकाल देनी चाहिए। मैं अपनी ही बात करूं तो 73 साल की उम्र में मुझे कोई क्या दे सकता है? हम किसी का विरोध नहीं कर रहे, हम सब मंच से सिर्फ इतना कह रहे हैं कि कांग्रेस को मजबूत करो। ऐसा कहने में तो कोई हर्ज नहीं है।

जी-23 के लीडर्स जो कदम उठा रहे हैं, उससे अब तक कांग्रेस को कितनी मजबूती मिली है?
बदलाव कभी एक दिन में नहीं होता। बदलाव में समय लगता है। बड़े-बड़े संस्थानों के ढांचे न एक दिन में गिरते हैं और न ही एक दिन में बनते हैं। हमने कोशिश की और हम कोशिश कर रहे हैं। सब कांग्रेसी मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे। इसमें नेतृत्व भी शामिल है। हमें लगता है कि हम कामयाब होंगे। वक्त आने पर यह दिखेगा भी।

अगर आपके सुझाव नहीं माने जाते तो आगे का रास्ता क्या होगा?
मैंने पहले भी कहा कि इन सारी चीजों में वक्त लगता है। कुछ समय पहले पार्टी ने खुद कहा है कि जून में अध्यक्ष का चुनाव होगा। हम उम्मीद करते हैं कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी का भी चुनाव होगा। इसका मतलब है कि लीडरशिप हमारी बात सुन रही है।

कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारकों की जो लिस्ट आई है, उसमें आप लोगों को शामिल नहीं किया गया है। पांच राज्यों के चुनाव के लिए आप लोग अपनी क्या भूमिका तय करेंगे?
अगर किसी की नजर में हम स्टार नहीं हैं तो हम कार्यकर्ता तो हैं। कोई प्रत्याशी हमें बुलाएगा तो हम जरूर जाएंगे।

देश का जो मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य है, उस पर आपका क्या नजरिया है?
बीजेपी इमरजेंसी की आलोचना करती है, लेकिन इनके समय में देश में डिफैक्टो इमरजेंसी है। सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल में डाल दिया जा रहा है, उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। बीजेपी एक तरफ भय का माहौल बना रही है और दूसरी तरफ आर्थिक शक्ति के बल पर अपना विस्तार कर रही है।

तो क्या यह माना जाए कि बीजेपी ने विपक्ष के लिए भी कोई स्पेस नहीं छोड़ा है?
वे विपक्ष को सदन में भी बोलने का मौका नहीं देते। विपक्ष सदन में भी अपने अजेंडे पर बात ही नहीं कर पा रहा है। अगर कांग्रेस सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर खड़ा करती है तो हम सब मिलकर बीजेपी को हरा सकते हैं। कांग्रेस ही देश में एक ऐसी राष्ट्रीय पार्टी है, जो सबको एक साथ ला सकती है।