26 जनवरी हिंसा में गिरफ्तारी के बाद किसी ने कहा कि वह टूलकिट से प्रेरित हुआ? अदालत में जमानत याचिका पर दी गई दलील

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नई दिल्ली
किसान आंदोलन से जुड़े टूलकिट मामले में आरोपी मुंबई की वकील निकिता जैकब, पुणे के इंजीनियर शांतनु मुलक और क्लाइमेट एक्टिविस्ट शुभम कर चौधरी की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने की। इस दौरान सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन ने निकिता जैकब की तरफ से पैरवी की। शांतनु मुलुक के लिए एडवोकेट वृंदा ग्रोवर और सुभम कर चौधरी के लिए एडवोकेट सौतिक बनर्जी ने दलीलें पेश की।

किसी ने कहा कि वह टूलकिट पढ़ हिंसा के लिए प्रेरित हुए
निकिता जैबक की वकील ने कहा कि 26 जनवरी को हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार हुए किसी भी व्यक्ति ने क्या यह कहा कि वह टूलकिट पढ़ने के बाद हिंसा के लिए प्रेरित हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि टूलकिट बनाने के दौरान मेरे किस एक्ट से 26 फरवरी को हिंसा भड़की? या मेरे किसी पोस्ट से? उन्होंने कहा कि हजारों महिलाएं हैं जो इस कानून का विरोध कर रही है। रेबेका जॉन ने केहर सिंह मामले का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत मंजूर करने की मांग की। अदालत ने कहा कि यदि आपका मतलब किसानों के मुद्दे से था तो डॉक्यूमेंट में एवरग्रीन शब्द का क्या मतलब है। इस पर एडवोकेट ने कहा कि मुझे इसका मतलब मालूम नहीं है। मैंने इसे ड्राफ्ट नहीं किया।

जूम कॉल में शामिल होना आपराधिक षड्यंत्र नहीं
रेबेका जॉन ने कहा कि जूम कॉल में शामिल होने आपराधिक षड्यंत्र नहीं है। इसके अलावा टूलकिट एडिट किया, इसे हाइपरलिंक करना राजद्रोह नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी मुवक्किल अलग-अलग मौके पर 16 दिन लगभग 140 घंटे पुलिस के सामने पेश हुईं। इस दौरान दिशा रवि और अन्य आरोपियों के साथ बैठाकर बातचीत हुई है। ना तो मैं विरोध प्रदर्शन में शामिल थी ना ही मैं इस मामले में सह आरोपियों को जानती हूं। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या आप शांतनु मुलक की बात कर रही हैं। इस पर उन्होंने कहा कि हां, वह पहली बार उनसे आमने सामने पूछताछ के दौरान ही मिली थीं।

यदि मैं टूलकिट में शामिल थीं तो क्या
निकिता जैकब की वकील ने कहा कि संजना जूम कॉल में शामिल थीं। उन्होंने क्या किया? यदि हम इसे देखें, तो उनकी भूमिका यह थी कि वह ज़ूम कॉल में शामिल हुई थी जहां उन्हें नहीं पता था कि कौन कौन था। उन्होंने टूलकिट पर काम किया। एडवोकेट ने कहा कि उनकी मुवक्किल यह नहीं कह रही हैं कि उन्होंने एक या दो लाइन एडिट की। उनका कहना है कि उन्होंने इसपर काम किया है तो इसमें क्या बात है? जैकब ने 26 जनवरी को Ex R के इंस्टाग्राम पेज पर लाइव करने की बात भी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि 3 फरवरी को दिशा रवि ने टूलकिट फॉरवर्ड किया।

बाद में हुई शामिल फिर ग्रुप से निकल गई थी
एडवोकेट रेबेका जॉन ने कहा कि उनकी मुवक्किल 2014 से बॉम्बे में वकालत कर रही हैं। उन्होंने सितंबर 2020 में एक्टिंसन रिबिलयन ऑर्गनाइजेशन (Ex R)जॉइन किया था। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या यह शांतिपूर्ण संगठन है? उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 2020 को दिशा रवि की तरफ से इंटरनेशनल किसान आंदोलन को लेकर वाट्सऐप ग्रुप बनाया गया था और निकिता जैकब उस ग्रुप की मेंबर नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह बाद में 11 जनवरी को ग्रुप में शामिल हुईं और 24 जनवरी को बाहर निकल गईं। एडवोकेट ने कहा कि 11 फरवरी 2021 को पुलिस ने उनके सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज जब्त कर लिए।

खालिस्तान समर्थक तत्वों के संपर्क में होने का आरोप
दिल्ली पुलिस गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित ‘टूलकिट’ मामले की आरोपी निकिता जैकब से कई बार पूछताछ की थी। निकिता जैकब पर दस्तावेज तैयार करने और खालिस्तान-समर्थक तत्वों के सीधे सम्पर्क में होने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि ‘टूलकिट’ बनाकर किसानों को भड़काकर हिंसा फैलाने के पीछे खालिस्तान से जुड़े संगठनों की साजिश थी।