बीजेपी के लो प्रोफाइल नेता हैं तीरथ, पार्टी ने इस मकसद से दी उत्तराखंड की कमान

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नई दिल्ली
गुटबाजी से जूझ रही उत्तराखंड बीजेपी को चुनाव से पहले एकजुट करने के लिए को मुख्यमंत्री बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक तीरथ के नाम पर किसी को कोई गंभीर आपत्ति नहीं थी। तीरथ का लो प्रोफाइल रहना भी उनके लिए मददगार बना।

उत्तराखंड बीजेपी सूत्रों के मुताबिक कुछ विधायकों ने इस पर खुलकर आपत्ति जताई थी कि त्रिवेंद्र सिंह रावत उनकी जगह पर धन सिंह रावत को सीएम बनाने के लिए नाम आगे कर रहे हैं। खुद भी सीएम बनने की जुगत लगा रहे विधायकों ने सवाल उठाया कि धन सिंह पहली बार के विधायक हैं उन्हें सीएम कैसे स्वीकार कर सकते हैं। एक और सांसद के नाम पर भी चर्चा हुई लेकिन उनका उत्तराखंड में ही पुराना इतिहास आड़े आ गया।

सूत्रों ने कहा कि तीरथ सिंह के नाम पर किसी का विरोध इसलिए नहीं था क्योंकि वह किसी गुट के नहीं माने जाते। एक विधायक ने कहा कि वे तो ना किसी से दोस्ती ना किसी से बैर वाले अंदाज में चलते हैं। विधायक ने कहा कि हमें उम्मीद है कि उनसे मिलने और अपनी बैत पहुंचाने में मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि यह सवाल भी सामने आ रहा है कि क्या तीरथ अफसरशाही को काबू में रख पाएंगे। उनकी इमेज के इतर उन्हें कड़क प्रशासक बनकर दिखाना होगा।

त्रिवेंद्र की जगह पर तीरथ को सीएम बनाने से बीजेपी को कुमाऊं के विधायकों और नेताओं ने भी सवाल उठाया कि सरकार में गढ़वाल को ही तव्वजो दी जा रही है। इससे कुमाऊं में नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। साथ ही बार बार ठाकुरों को मौका देने और ब्राह्मणों को किनारे करने की चर्चा भी शुरू हो गई है। बीजेपी के एक नेता ने करा कि हमें भरोसा दिलाया गया है कि इससे कोई मुश्किल खड़ी नहीं होगी। इसलिए हम उम्मीद कर रहे हैं कि मंत्रिमंडल तय करने में इसे बैलेंस किया जाएगा।