चाको के इस्तीफे पर आनंद शर्मा बोले- होता रहता है, खेड़ा ने कहा- बहुत देर कर दी हुजूर

0
15

नयी दिल्ली
2019 के लोकसभा के चुनाव में हार के बाद से ही कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं। कांग्रेस के तमाम नेता एक सुर में नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भी कांग्रेस से इस्तीफा सौंप दिया है। उनके इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने यह भी कह दिया कि जिनको जाना है वे जाएं।

‘बहुत देर कर दी हुजूर जाते-जाते’कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पी सी चाको के कांग्रेस छोड़ने पर बुधवार को उन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली में प्रभारी रहते हुए गुटबाजी को बढ़ावा देने वाले व्यक्ति ने पार्टी से जाने में बहुत देर कर दी। उन्होंने चाको के एक बयान को लेकर ट्वीट किया, ‘ यह बात वह व्यक्ति कहता है जिसने दिल्ली में गुटबाजी को सक्रियता के साथ प्रोत्साहित किया और बढ़ावा दिया। बहुत देर कर दी हुजूर जाते जाते।’

शर्मा बोले- पार्टियों में तो होता रहता हैकांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि जिन्हें पार्टी छोड़ना हो, वे छोड़ सकते हैं। ऐसा राजनीतिक दलों में होता रहता है। लेकिन कांग्रेस पार्टी यह बताएगी कि वह इस चुनाव में एकजुट होकर कैसे लड़ सकती है। कांग्रेस का यही प्रयास होगा। पीसी चाको केरल से आते हैं जहां पर विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में चाको का जाना केरल में कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।

गुटबाजी के चलते चाको का इस्तीफा चाको ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार तय करने में गुटबाजी हावी रही। पिछले साल हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय चाको कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी थे। उस चुनाव में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका था और ज्यादातर सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इस चुनाव के बाद ही चाको ने प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया था।

दो धड़ों में बंट गई कांग्रेसचाको ने पार्टी की अंतरिम अध्‍यक्ष
को अपना इस्‍तीफा भेज दिया है। चाको ने कहा कि केरल में कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है। उन्‍होंने कहा कि वे हाईकमान से दखल देने की गुजारिश करते-करते थक गए हैं। चाको ने कहा कि केरल कांग्रेस में जो कुछ भी घट रहा है, आलाकमान उसे चुपचाप देख रहा है। चाको वही नेता हैं जिन्‍होंने करीब दो साल पहले गांधी परिवार को ‘देश का पहला परिवार’ बताकर बखेड़ा खड़ा कर दिया था। तब इसके लिए उनकी खासी आलोचना हुई थी और बीजेपी ने उनपर गांधी परिवार की चाटुकारिता का आरोप लगाया था।