जो गुनाह किया नहीं, उसकी 14 साल सजा काटी, टीचर की नौकरी गई और अब मिली रिहा

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बलिया
उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के रहने वाले एक शख्स को 14 साल की सजा के बाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। मुकेश तिवारी को 2007 में हुई एक हत्या के मामले में सेशन कोर्ट ने 2009 में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद 4 मार्च को कोर्ट ने सुनवाई के बाद ठोस सबूतों के अभाव में उन्हें बाइज्जत रिहा करने का फैसला सुनाया। जिसके बाद वह जेल से छूट कर वह अपने घर पहुंचे।

2009 में सजा सुनाई गई
बताया जा रहा है कि 30 जुलाई 2007 को प्रताप शंकर मिश्र की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मिली तहरीर के आधार पर मुकेश को भी हत्याकांड में आरोपी बनाया गया। इस मामले में मुकेश को सेशन कोर्ट से साल 2009 में सजा सुनाई गई। इसके बाद घरवालों ने कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। जहां सुनवाई चलती रही। हाईकोर्ट ने सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 4 मार्च को मुकेश की रिहाई के आदेश दिए। इस बीच मुकेश को जेल में ही रहना पड़ा।

‘यकीन था एक दिन न्याय जरूर मिलेगा’
रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब मुकेश घर पहुंचे तो उनकी मां, पत्नी और पिता की आंखें खुशी से छलक आईं। मुकेश ने बताया कि अगर वह इस मामले में नहीं फंसे होते तो आज वह सरकारी प्राइमरी स्कूल में अध्यापक होते। उन्होंने बताया कि उनका विशिष्ट बीटीसी के तहत चयन हो गया था। जिसके काउंसलिंग में शामिल होने का पत्र बाद में मिला था। मुकेश को अफसोस है कि उनके जीवन के बहुमूल्य 14 साल जेल की सलाखों के पीछे बीते, जबकि वह निर्दोष थे। मुकेश ने न्यायालय का धन्यवाद देते हुए कहा, ‘उन्हें यकीन था कि एक दिन उनको न्याय जरूर मिलेगा।’