प्रयागराज में अस्पताल की ‘दरिंदगी’ पर राष्ट्रीय बाल आयोग सख्त, दिए FIR के आदेश

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नयी दिल्ली
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने प्रयागराज के जिला अधिकारी से कहा है कि एक अस्पताल के कथित तौर पर गैरजिम्मेदार रवैये के कारण एक बच्चे की मौत होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच कराई जाए। बीते 5 मार्च को एक पत्रकार ने एक खबर ट्वीट की थी जिसमें कहा गया था कि प्रयागराज में यूनाइटेड मेड-सिटी अस्पताल में तीन साल के बच्चे के ऑपरेशन के लिए पांच लाख रुपये की रकम नहीं दिए जाने पर उस बच्चे के चिरे हुए पेट पर टांका लगाए बिना ही उसे घर भेज दिया गया। बाद में बच्चे की मौत हो गई।

बच्चे में पेट में टांका तक नहीं लगाया एनसीपीसीआर ने एक बयान में कहा, ‘बच्चे के परिवार की सामाजिक-आर्थिक हालत कमजोर है और ऐसे में वह अपनी जमीन बेचकर दो लाख रुपये की रकम ही दे सका। परिवार शेष रकम नहीं दे पाया जिस कारण बच्चे के पेट का टांका लगाए बिना ही उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया।’

आयोग ने कहा- कड़ी कार्रवाई करनी चाहिएआयोग ने जिला अधिकारी से कहा कि वह इस मामले की जांच कराएं और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएं। उसने यह भी कहा कि इस अमानवीय व्यवहार के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

यहां समझिए मामलाप्रयागराज के करेली इलाके के रहने वाले ब्रह्मदीन मिश्रा की तीन साल की बेटी को पेट में प्रॉब्लम थी। मां-बाप ने इलाज के लिए प्रयागराज के धूमनगंज के रावतपुर एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया। कुछ दिन बाद बच्ची के पेट का ऑपरेशन किया गया। इसकेक बाद एक ऑपरेशन और हुआ। बच्ची के पिता के मुताबिक इस ऑपरेशन का डेढ़ लाख रुपए ले लेने के बाद भी हॉस्पिटल प्रशासन ने पांच लाख की डिमांड की। जब रुपए नहीं दे पाए तो हॉस्पिटल प्रशासन नेबच्ची सहित परिवार को बाहर भेज दिया और कहा क‍ि अब इसका इलाज यहां नहीं हो पाएगा।

जांच कमिटी गठितअस्पताल की संवेदनहीनता सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से जांच कमिटी बिठाई गई है। एडीएम सिटी और सीएमओ इस मामले की जांच करेंगे। दोषियों पर जल्द-से-जल्द कार्रवाई की बात कही जा रही है। वहीं, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने प्रयागराज कलेक्टर से 24 घंटे के अंदर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

पेट में दर्द के इलाज के लिए पहुंची थी अस्पतालप्रयागराज के करेली थाना क्षेत्र के करेंहदा निवासी तीन साल की खुशी मिश्रा को पेट में दर्द था। मां-बाप ने इलाज के लिए प्रयागराज के धूमनगंज के रावतपुर स्थित यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया। आंत में इन्फेक्शन बताकर कुछ दिन बाद बच्ची के पेट का ऑपरेशन किया गया लेकिन टांके वाली जगह पर पस की समस्या हो गई थी।

नहीं दे पाए पैसाचार-पांच दिन बाद उसी जगह पर एक और ऑपरेशन किया गया। बच्ची के पिता के मुताबिक इस ऑपरेशन के लिए डेढ़ लाख रुपये ले लेने के बाद भी हॉस्पिटल प्रशासन ने पांच लाख रुपये की डिमांड की। जब रुपए नहीं दे पाए तो हॉस्पिटल प्रशासन ने बच्ची को फटे पेट के साथ ही परिवार समेत बाहर भेज दिया और कहा क‍ि अब इसका इलाज यहां नहीं हो पाएगा।

टांका भी नहीं लगाया, ऐसे ही बच्ची को सौंप दियाइसके बाद पिता अपनी बेटी को लेकर कई हॉस्पिटल तक गए। लेकिन सभी हॉस्पिटलों में बच्ची को लेने से मना कर दिया गया। कहा गया कि बच्ची की हालत बहुत क्रिटिकल है, वह नहीं बच पाएगी। बच्ची जिंदगी की जंग हार गई और उसने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। मृतक बच्ची के पिता का आरोप है कि डॉक्टर्स ने बच्ची के ऑपरेशन के बाद सिलाई, टांका नहीं किया और परिवार को ऐसे ही सौंप दिया। इसी वजह से दूसरे हॉस्पिटल ने बच्ची को लेने से मना कर दिया। बाद में इलाज के अभाव में बच्ची ने दम तोड़ दिया।

इलाज के लिए पिता ने खेत तक बेचायह भी बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता ने इलाज के लिए अपने हिस्सा का दो बिस्वा खेत भी बेच दिया था। रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए लेकिन बच्ची को नहीं बचा सका। 3 साल की बेटी की मौत के बाद परिवार बदहवास है।

अस्पताल ने आरोपों को निराधार बतायाउधर, अस्पताल ने अपनी सफाई में आरोपों में बेबुनियाद बताया। अस्पताल ने कहा कि माता-पिता की सहमति से 24 फरवरी को ऑपरेशन हुआ था और आगे के उपचार के लिए एसआरएन के लिए रेफर किया गया था, लेकिन परिजन बच्ची को लेकर चिल्ड्रन अस्पताल गए थे। अस्पताल ने दावा किया था चिल्ड्रन अस्पताल में ही बच्ची की मौत हुई। साथ ही यह भी दावा किया कि बच्ची के इलाज का खर्च 1.25 लाख रुपये था लेकिन परिवार से महज 6 हजार रुपये लिए गए थे।