BJP के ‘राम’ के मुकाबले ममता के ‘शिव’, महाशिवरात्रि पर नामांकन, आखिर क्या इशारा?

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कोलकाता
पश्चिम बंगाल (West Bengal Election) में राजनीति दिलचस्प मोड़ लेती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जहां चुनावी समर में हिंदुत्व और जय श्री राम के नारे को लेकर मुख्यमंत्री () के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ है। वहीं ममता भी अब सॉफ्ट हिंदुत्व की इसी पिच पर मौके पर चौका मारने की तैयारी में हैं। बीजेपी के राम के नारे के जवाब में ममता ने भगवान शिव का कार्ड खेला है। उन्होंने चुनाव में नामांकन के लिए महाशिवरात्रि पर्व के दिन को चुना है।

दरअसल, ममता बनर्जी ने इस बार मेदिनीपुर के नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस बात की संभावना है कि ममता अपनी पुरानी भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों ही सीटों से चुनाव लड़ सकती हैं। नंदीग्राम में ममता ने चुनावी नामांकन के लिए 11 मार्च का दिन चुना है, इस दिन ही महाशिवरात्रि का पर्व भी पड़ रहा है। ममता की चुनावी तैयारियों को लेकर सारी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उनके लिए चुनावी कार्यालय और एक अस्थाई निवास का प्रबंध भी किया गया है।

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सूत्रों के अनुसार शिवरात्रि के दिन नामांकन करने कर ममता खुद के शिव भक्त होने का सबूत देना चाहती हैं। ऐसा इसलिए हिंदू धर्म में कोई भी बड़ा काम किसी पवित्र दिन के अवसर पर किया जाता है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि नामांकन के लिए महाशिवरात्रि का दिन ममता, बीजेपी के जय श्रीराम के नारे का जवाब देना चाहती हैं। चर्चा इस बात की भी है कि ममता नामांकन और चुनाव प्रचार पैदल ही करेंगी। ममता का यह दांव कितना रंग लाता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम का सूबे की राजनीति में अहम स्थान है। नंदीग्राम में ही किसानों पर गोली चलवाने के बाद हुए आंदोलन के परिणामस्वरूप ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई थी। अब 10 साल बाद यही नंदीग्राम एक बार फिर से बंगाल के संग्राम का केंद्र बन गया है। ममता खुद यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। अब बीजेपी भी कभी उनके भरोसेमंद रहे सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारने की तैयारी में है।