कल बड़ा फैसला ले सकते हैं नीतीश के पुराने मित्र उपेंद्र कुशवाहा, जानें क्या हैं अटकलें

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पटना।
उपेंद्र कुशवाहा ने फरवरी 2009 में राष्ट्रीय समता पार्टी की स्थापना की थी जिसका समर्थन महाराष्ट्र के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने किया था। इसके बाद नवंबर 2009 में, पार्टी को उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के बीच अच्छे रिश्तो की वजह राष्ट्रीय समता पार्टी को जेडीयू में मर्ज कर दिया गया था। लेकिन 4 जनवरी 2013 को तत्कालीन राज्यसभा सांसद और जेडीयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसके दो महीने बाद यानी 03 मार्च 2013 को उपेंद्र कुशवाहा ने पटना के गांधी मैदान में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का गठन किया था। इसी वजह से राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा एक बार फिर से अपनी पार्टी का विलय जनता दल यूनाइटेड में कर सकते हैं।

नीतीश कुमार चाहते है जेडीयू में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का विलय !
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सारी पुरानी बातों को भूल कर उपेंद्र कुशवाहा को अपने साथ लाने के इच्छुक हैं। वही मिली जानकारी के अनुसार आरएलएसपी ( RLSP ) चीफ उपेंद्र कुशवाहा भी वर्तमान परिस्थिति में नीतीश कुमार के साथ जाने को तैयार हैं। लेकिन अभी तक उपेंद्र कुशवाहा ने यह निर्णय नहीं लिया है कि वह एनडीए ( NDA ) में शामिल होंगे या फिर अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ( RLSP ) का जेडीयू ( JDU ) में विलय करेंगे। सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी का विलय जेडीयू में करने की बात कही है।

इस विषय पर जेडीयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी कहा कि अंतिम निर्णय उपेंद्र कुशवाहा को ही लेना है। तो क्या 3 मार्च यानी बुधवार को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के आठवें स्थापना दिवस पर पार्टी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। बता दें कि कई बार रालोसपा के जेडीयू में मर्ज होने की खबर आ चुकी है। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा की ओर से मर्जर की बात का खंडन तो किया गया लेकिन उनकी ओर बातें जिस तरीके से कही गई वो कुछ दूसरी कहानी ही बयां करती है।

नीतीश कुमार के लव – कुश समीकरण में फिट होंगे उपेंद्र कुशवाहा !
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी में लव कुश समीकरण के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर चुके हैं। अब इसी समीकरण के तहत उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू में वापस लाने की तैयारी की जा रही है। सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू अपने कोटे से बिहार विधान परिषद भेजकर बिहार सरकार में मंत्री बनाने को भी तैयार है। बता दें कि 9 फरवरी को हुए मंत्रीमंडल विस्तार के बाद बिहार सरकार में मंत्री की कुल संख्या 31 है यानी अभी और पांच मंत्री बनाए जा सकते हैं जिनमें एक नाम उपेंद्र कुशवाहा का हो सकता है। गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार – 1 में केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री रह चुके हैं।

संगठन को मजबूत करने के लिए नीतीश को भी है उपेंद्र की दरकार
विधानसभा चुनाव 2020 के चुनाव परिणाम से नाखुश नीतीश कुमार पार्टी को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठा चुके हैं। गौरतलब है कि 2015 में जब वह लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़े थे तब जेडीयू को 70 सीटें मिली थी। लेकिन घर वापसी करते हुए जब नीतीश कुमार ने एनडीए में रहते चुनाव लड़ा तो उनकी पार्टी महज 43 सीटों पर सिमट कर रह गई। यही वजह है कि नीतीश कुमार एक बार फिर से अपने पुराने समीकरण लव – कुश यानी कुर्मी – कुशवाहा वोट बैंक को मजबूत करने की जुगत में लगें हैं। इसी के तहत नीतीश कुमार ने खुद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस्तीफा देकर कुर्मी जाति से आने वाले अपने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया।

इसके बाद 10 जनवरी 2021 को नीतीश कुमार ने राज्य कार्यकारिणी की बैठक में विधानसभा चुनाव हार चुके उमेश सिंह कुशवाहा को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। हालांकि उमेश सिंह कुशवाहा को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का मकसद कुशवाहा समाज को जेडीयू की ओर आकर्षित करना था। लेकिन कुशवाहा समाज पर उपेंद्र कुशवाहा की पकड़ को देखते हुए उन्हे वापस जेडीयू में लाने की कोशिश की जा रही है।

LJP की कमी को पूरी करेंगे उपेंद्र कुशवाहा !
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सूत्रों ने बताया कि रालोसपा के जेडीयू में विलय के कयास के जवाब में आरएलएसपी के नेताओं ने कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है। तो क्या यह मान लिया जाए कि लोजपा (LJP) की की कमी को रालोसपा (RLSP) का जेडीयू में विलय करा कर पूरा किया जाएगा। क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान ही बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) गठबंधन का हिस्सा नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि दिवंगत रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के एनडीए से बाहर जाने के बाद मजबूती बनाए रखने के लिए उपेंद्र कुशवाहा की एंट्री कराई जा रही है। यानी नीतीश कुमार अब चिराग पासवान के हमले का जबाब देने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को हथियार के तौर पर
इस्तेमाल करेंगे।

बिखर चुकी है राष्ट्रीय लोक समता पार्टी
03 मार्च 2013 को पार्टी का गठन करने वाले उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में शामिल होकर 2014 लोकसभा चुनाव में सीतामढ़ी, काराकाट और जहानाबाद में 3 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी को जीत लिया। उपेंद्र कुशवाहा खुद काराकाट निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे और उन्हें केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके एक साल बाद रालोसपा ने 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में 23 पर चुनाव लड़ा था लेकिन वह केवल दो सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी।

इसके बाद पार्टी उपेंद्र कुशवाहा और दूसरा जहानाबाद सांसद अरुण कुमार के दो धड़े में बंट गई। इसके बाद 2018 में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने एनडीए छोड़ महागठबंधन में शामिल हो गई। लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में 5 सीट पर चुनाव लड़ने वाली उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी एक भी सीट नही जीत सकी। इस चुनाव के बाद रालोसपा के पार्टी के दो विधायक और एक विधान पार्षद जेडीयू में शामिल हो गये थे।

RLSP चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए ‘ ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट ‘ गठबंधन बनाया। इस गठबंधन में असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ ही समाजवादी दल डेमोक्रेटिक, जनतांत्रिक पार्टी सोशलिस्ट और रालोसपा (RLSP) शामिल थी। गठबंधन की ओर से RLSP अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी घोषित किया गया था।

लेकिन 2020 विधानसभा चुनाव में ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट ( GDSF ) में शामिल AIMIM को पांच और BSP को एकमात्र सीट पर सफलता मिली। आपको याद दिला दें कि बीएसपी के एकमात्र विधायक अब जेडीयू के सदस्य होने के साथ साथ बिहार सरकार के मंत्री भी बन चुके है। वहीं गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी एक भी सीट पर जीत हासिल नही कर सकी थी।