पूर्व CJI गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न केस में SC की बड़ी टिप्पणी, फंसाने की साजिश से इनकार नहीं

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नई दिल्ली
के पूर्व चीफ जस्टिस के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के पीछे क्या कोई साजिश थी, इस बात का परीक्षण करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के पीछे व्यापक साजिश की जांच की कार्रवाई को बंद किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दो साल गुजर चुके हैं और इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड को पुन: प्राप्त करना मुश्किल है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कौल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि जस्टिस (रिटायर) एके पटनायक की जांच कमिटी ने पाया है कि तत्कालीन चीफ जस्टिस पर लगाए गए आरोपों के पीछे की साजिश की जांच के लिए इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड जैसे वॉट्सएप मैसेज आदि को दोबारा पाना मुमकिन नहीं है।

पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप के पीछे की साजिश की जांच के लिए बनाए गए पूर्व जस्टिस एके पटनायक की जांच रिपोर्ट का सुप्रीम कोर्ट ने हवाला दिया और केस बंद कर दिया। जस्टिस कौल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि जस्टिस पटनायक की जांच पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के पीछे की साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल में कई सख्त फैसले लिए। इस कारण उन्हें निशाने पर लिया गया होगा और आरोप लगाया गया होगा और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस रिपोर्ट में आईबी की रिपोर्ट का हवाला दिया गया कि कई लोग जस्टिस गोगोई के एनआरसी जैसे मामले में दिए गए फैसले से बेहद नाराज थे।
जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दो साल बीत चुके हैं और ये मुश्किल है कि अब दोबारा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। रिपोर्ट के हवाले से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता उत्सव बेंस ने कई ऐसे आरोप भी लगाए थे जिन्हें वेरिफाई नहीं किया जा सका। ऐसे में अब आरोपों के पीछे की साजिश को एग्जामिन करने के लिए केस को जारी रखने की जरूरत नहीं है और मामले को क्लोज किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस पटनायक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ ठोस आधार हैं जिससे लगता है कि तत्कालीन चीफ जस्टिस गोगोई के खिलाफ साजिश हो सकती है। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड दोबारा मिलना मुश्किल है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मत है कि मौजूदा मामले को बंद किया जाए और जस्टिस पटनायक की रिपोर्ट को दोबारा सील बंद कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कार्यवाही बंद करते हुए कहा कि मामले ने इन हाउस कार्रवाई पहले ही हो चुकी है और जस्टिस एसए बोबडे (अब चीफ जस्टिस) की अगुवाई वाला पैनल पहले ही पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई को क्लीन चिट दे चुकी है।

गौरतलब है कि 25 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने जूडिशरी पर सुनियोजित अटैक पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि समय आ गया है कि अमीर और पावरफुल लोगों को कहा जाए कि वो आग के साथ खेल रहे हैंं। अदालत ने कहा था कि क्या अमीर और पावरफुल लोग ये समझते हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट को रिमोट कंट्रोल कर सकते हैं? पावरफुल लोग समझते हैं कि वह देश चला सकते हैं। देश के लोगों को सच्चाई जाननी चाहिए और पूरी दुनिया ये जाने कि सुप्रीम कोर्ट को पैसे और पावर से नहीं चलाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को साजिश के तहत फंसाने का दावा करते हुए वकील उत्सव ने जो आरोप लगाएं हैं उसकी जांच का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस एके पटनायक को दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस एके पटनायक को उत्सव बैंस के आरोपों की जांच करने को कहा था। उत्सव बैंस ने आरोप लगाया था कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को फंसाने के लिए साजिश रची गई थी।

यौन उत्पीड़न और बेंच फिक्सिंग के आरोपों के पीछे की साजिश की जांच होनी चाहिए। जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली स्पेशल बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि रिटायर जस्टिस पटनायक मामले में उत्सव के लगाए गए आरोपों की जांच करेंगे। अदालत ने कहा था कि पुलिस कमिश्नर, आईबी और सीबीआई चीफ को निर्देश दिया जाता है कि वह रिटायर जस्टिस पटनायक को जांच में सहयोग करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर जस्टिस पटनायक से कहा था कि वह अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखें।