संपादकीय: कोरोना के नए मामलों में कमी, उठने न दें दूसरी लहर

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देश में कोरोना का टीकाकरण अभियान शुरू हुए आज एक महीना पूरा हो रहा है। 16 जनवरी से पहले चरण के तहत स्वास्थ्यकर्मियों को टीका देने की शुरुआत हुई थी। 28 दिन पूरा होने के बाद इन लोगों को दूसरा डोज दिया जाना भी शुरू हो गया है। इस बीच देश में नए संक्रमणों की संख्या में खासी कमी आई है। हालांकि दुनिया में हर जगह इस महामारी की एक लहर मंद पड़ने के बाद दूसरी लहर दर्ज की गई है, जिससे हम फिलहाल बचे हुए हैं। अमेरिका और यूरोप में नए केसों और मृतकों से जुड़े आंकड़े एक बार बहुत नीचे चले गए थे, फिर भी वैश्विक आंकड़ों पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिखा तो उसकी वजह यह रही कि एक देश में कमी के आंकड़े दूसरे नए क्षेत्रों में वायरस के फैलाव से बैलेंस होते जा रहे थे।

गनीमत है कि भारत में महामारी में उतार का दौर काफी लंबा चल गया है और जानकार दायरों में यह उम्मीद भी जताई जाने लगी है कि दूसरी लहर की नौबत यहां शायद न ही आए। भारत में महामारी सितंबर महीने में अपने चरम पर थी, जब रोज करीब एक लाख तक नए केस आने लगे थे। इसके बाद गिरावट का क्रम शुरू हुआ और अभी दस हजार के आसपास नए केस रोजाना दर्ज हो रहे हैं। इस कमी में टीके की कोई खास भूमिका नहीं मानी जा सकती। कारण एक तो यह कि टीकाकरण काफी देर से शुरू हुआ जबकि गिरावट काफी पहले से दिखाई देने लगी थी।

दूसरी बात यह कि टीके अभी सिर्फ डॉक्टरों और हॉस्पिटल स्टाफ जैसे फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स को ही लगाए गए हैं और इन्हें भी अभी पहला डोज ही मिल पाया है। टीके का पूरा असर दूसरा डोज दिए जाने के बाद ही जांचा जा सकेगा। हालिया अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञ महामारी में आई इस कमी का श्रेय देशवासियों के शरीर में बड़े पैमाने पर जन्मी एंडीबॉडीज को देते हैं। उनके मुताबिक अलग-अलग इलाकों में 20 से 40 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में संक्रमित हो चुके हैं और उनके अंदर कोरोना का प्रतिरोध भी विकसित हो चुका है।

हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि इतनी इम्यूनिटी के आधार पर दूसरी लहर की संभावना खारिज नहीं की जा सकती है। महामारी की मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो एक्टिव केसेज में 45 फीसदी केरल और 26 फीसदी महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं। केवल 29 फीसदी ही देश के बाकी हिस्सों में मौजूद हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि बचाव के प्रयासों को भी केरल और महाराष्ट्र पर ज्यादा केंद्रित किया जाए।

टीकाकरण की मौजूदा नीति स्वास्थ्यकर्मियों के बाद 1 मार्च से 50 की उम्र पार कर चुके लोगों को वैक्सीन देने की है। लेकिन अच्छा होगा कि ज्यादा एक्टिव केसेज वाले दोनों राज्यों में टीकाकरण का दायरा जल्दी बढ़ा दिया जाए। खासकर केरल में युनिवर्सल वैक्सिनेशन भी एक कारगर विकल्प हो सकता है।