उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से बनी कृत्रिम झील, ब्लास्ट के जरिए पानी निकालने पर हो रहा विचार

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नई दिल्ली
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से आई आपदा के बाद ऋषिगंगा के ऊपरी क्षेत्र में बनी कृत्रिम झील पर अध्ययन कर रहा है और इसमें से पानी को बाहर निकालने के लिए नियंत्रित विस्फोट की संभावना की पड़ताल कर रहा है। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष सौमित्र हलदर ने शनिवार को बताया कि अध्ययन भारत मौसम विज्ञान विभाग के इस पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर किया जा रहा है कि क्षेत्र में 15 और 16 फरवरी को एक सेंटीमीटर बारिश और हिमपात हो सकता है।

आयोग इस बारे में भी पड़ताल कर रहा है कि यदि जलस्तर ‘‘गंभीर’’ स्तर तक पहुंचता है तो क्या किया जा सकता है। हलदर ने कहा, ‘‘हम इस बारे में आकलन कर रहे हैं कि यदि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबकि बारिश और हिमपात के बाद जलस्तर बढ़ता है तो क्या प्रभाव हो सकता है। हम इस बारे में भी अध्ययन कर रहे हैं कि यदि झील फटती है तो कितना पानी निकलेगा और इसे नीचे तक पहुंचने में कितना समय लगेगा।’’

हलदर ने कहा कि झील 400 मीटर लंबी, 25 मीटर चौड़ी और 60 मीटर गहरी है। हलदर ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि झील का आकार और बढ़े। हम नियंत्रित विस्फोट सहित सभी संभावनाओं की पड़ताल कर रहे हैं।’ उन्होंने हालांकि कहा कि संबंधित झील स्थल तक पहुंच नहीं है और अभी यह निर्णय नहीं हुआ है कि कौन सी एजेंसी नियंत्रित विस्फोट का काम करेगी।

केंद्रीय जल आयोग के प्रमुख ने कहा, ‘‘नियंत्रित विस्फोट संभव न होने की सूरत में स्थिति से निपटने के लिए हम अन्य तरीके भी तलाश रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सहित कई एंजेंसियों/ संस्थानों ने झील पर अध्ययन किया है। हलदर ने कहा कि जोशीमठ से हरिद्वार तक अब तक जलस्तर में कोई वृद्धि नहीं है और ‘‘हम निचले क्षेत्र में जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहे हैं।’’