समय बीतने के साथ 70 परिवारों की बढ़ी बेचैनी, UP से चमोली के लिए रवाना हो रहे घरवाले

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लखनऊ
उत्तराखंड के चमोली जिले में पिछले रविवार को आई प्राकृतिक आपदा में उत्तर प्रदेश के कम से कम 70 लोग लापता हैं। अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क करने में असमर्थ यूपी के अलग-अलग जिलों के लोग उत्तराखंड के लिए रवाना होने लगे हैं। यूपी सरकार ने भी लापता लोगों का पता लगाने के लिए परिजन की मदद के लिए व्यवस्था की है।

गोरखपुर में चार लोगों के परिवार के सदस्य मंगलवार को उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए। जगतबेला इलाके के निवासी वेद प्रकाश, धनुधारी, नागेंद्र सिंह और शेषनाथ उपाध्याय के परिवार के सदस्यों ने सोमवार शाम को जिला मैजिस्ट्रेट के विजेंद्र पांडियन से मुलाकात की थी और उन्हें अपने परिवार के सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी थी। राहत आयुक्त कार्यालय में स्थापित राज्यस्तरीय आपातकालीन परिचालन केंद्र गोरखपुर से लापता लोगों के बारे में बताया गया था।

मंगलवार सुबह चार लापता लोगों के परिवार के सदस्य लखनऊ के लिए रवाना हुए, जहां से वे उत्तराखंड जाएंगे। इसके अलावा आजमगढ़ में दीदारगंज क्षेत्र के निवासी ओम प्रकाश यादव के परिवार के सदस्य मंगलवार को उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए। आपदा के बाद से परिजन उनसे संपर्क नहीं कर पाए थे। ग्राम प्रधान वेद प्रकाश ने बताया कि ओम प्रकाश ऋषि गंगा पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में परियोजना प्रबंधक के रूप में तैनात थे।

रायबरेली जिले के हरचंदपुर क्षेत्र के निवासी दो भाई अनिल सिंह और नरेंद्र सिंह का भी आपदा के बाद पता नहीं चला। उनके परिजन भी उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए हैं। इसके अलावा चंदौली जिले के रहने वाले पंकज पांडे के भाई राहुल पांडे भी उत्तराखंड जा रहे हैं। उन्हें जिला प्रशासन से अपने भाई के लापता होने की जानकारी मिली थी। तपोवन में पर्यवेक्षक के रूप में काम करने वाले पंकज हादसे के बाद से लापता हैं।

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मंत्रियों का दल जाएगा उत्तराखंड
बता दें कि उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त संजय गोयल ने मंगलवार को बताया कि उत्तराखंड में आई आपदा में उत्तर प्रदेश के अब तक 70 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है जिनमें से 34 लोग लखीमपुर खीरी जिले के हैं। इसके अलावा सहारनपुर के नौ तथा श्रावस्ती के पांच लोग शामिल हैं। इस बीच, एक सरकारी प्रवक्‍ता के अनुसार मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने उत्तराखंड सरकार से समन्‍वय बनाने के लिए गन्‍ना विकास और चीनी मिलों के मंत्री सुरेश राणा के नेतृत्‍व में तीन सदस्‍यीय मंत्रियों की एक समिति बनाई है जिसमें मंत्री धर्म सिंह सैनी और विजय कश्‍यप भी शामिल हैं।

मंत्रियों का यह दल मंगलवार को उत्तराखंड के लिए रवाना हो गया। इसके अलावा उत्तराखंड शासन और प्रशासन से समन्‍वय के लिए अपर मुख्‍य सचिव (गृह) अवनीश अवस्‍थी के नेतृत्‍व में अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है। आपदा प्रभावित उत्तर प्रदेश के जिलों में भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जहां प्रशासन, पुलिस और सिंचाई विभाग के कर्मचारी 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

उत्तराखंड रवाना होने से पहले सुरेश राणा ने कहा, ‘मैं अपने दोनों सहयोगी मंत्रियों के साथ वहां पहुंचकर सबसे पहले उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से मुलाकात करूंगा। इस त्रासदी में जो लोग लापता हो गए हैं उनकी तलाश और जो काल-कवलित हुए हैं उनकी अंत्‍येष्टि के लिए उचित समन्‍वय बनाकर कार्य किया जाएगाा।’

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लापता लोगों के परिवार के लिए पहाड़ सरीखी है अपनों से जुदाई
वहीं चमोली जिले में पिछले रविवार को आई प्राकृतिक आपदा में लापता हुए लोगों के परिवार के लोग बेहद परेशान हैं। भूलनपुर गांव के रहने वाले 55 वर्षीय नत्थू लाल का इकलौता बेटा धर्मेंद्र तपोवन स्थित हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना में काम करता था और आपदा के 48 घंटे गुजरने के बाद भी उन्हें अपने बेटे की कोई खबर नहीं मिली है। नत्थू लाल ने बताया कि पिछली 5 फरवरी को ही उनके बेटे का फोन आया था। उस वक्त परिवार को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह परिवार से उसकी आखिरी बातचीत होगी।

उन्होंने बताया कि घर के माली हालात ठीक नहीं है इसलिए धर्मेंद्र ने तपोवन परियोजना में बतौर मजदूर काम करने का फैसला किया था और वह पिछली छह या सात जनवरी को चमोली रवाना हुआ था। सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन रविवार की आपदा उनके परिवार पर मानो पहाड़ की तरह टूट पड़ी। इच्छा नगर गांव में तो तीन परिवार इसी तकलीफ से गुजर रहे हैं। इस गांव में तीन परिवारों के छह लोगों समेत कुल 15 लोग चमोली की त्रासद घटना के बाद लापता हैं। वह सभी तपोवन परियोजना पर काम कर रहे थे।

भगवान से प्रार्थना कर रहा पूरा परिवार
इनमें से 50 वर्षीय श्रीकृष्ण की पत्नी ने बताया कि उनके पति और बेटा राजू इस वक्त कहां और किस हाल में हैं, उन्हें कुछ खबर नहीं है। उन्होंने बताया कि राजू की शादी इसी अप्रैल में होने वाली थी और उसने जल्द लौटने का वादा किया था। पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि श्रीकृष्ण और राजू के बारे में कोई अच्छी खबर मिले। आपदा से बचकर आए मिर्जागंज के मुजीम और इच्छा नगर के अजीम ने अपने परिजन को उस मुसीबत भरे वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि वह अपने रसोई गैस सिलेंडर को भरवाने के लिए पड़ोस के ही ऊंचाई वाले इलाके में गए थे। यह खुदा का करम ही था कि इसी वजह से वे कुदरत के कहर से बच गए।

हालांकि, उनके साथ काम करने वाले मिर्जागंज निवासी भलभल का अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। भैरमपुर गांव के निवासी कुल 18 मजदूर आपदा वाले दिन तपोवन परियोजना में काम कर रहे थे। ग्रामीणों के मुताबिक उनमें से 10 लोग तो बच गए मगर बाकी आठ का अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। इच्छा नगर और भैरमपुर गांवों को जोड़ने वाली मांझा ग्राम पंचायत के प्रधान संतोष भार्गव ने बताया कि उन्होंने तपोवन परियोजना का निर्माण करा रही ऋत्विक कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रबंध निदेशक राकेश धीमरी से बातचीत की है और इस आपदा से प्रभावित हुए मजदूरों के परिजन को समुचित आर्थिक मदद का आग्रह किया है।

इस बीच, लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने जिला मुख्यालय पर एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है जिसकी मदद से आपदा में लापता हुए लोगों के राहत और बचाव कार्य मैं मदद की जाएगी।

डीएनए से की जाएगी मृतकों की पहचान
वहीं, ऋषिगंगा में मरने वाले जिन लोगों की पहचान नहीं हो सकेगी, सरकार उनके डीएनए की जांच करवाएगी। इस डीएनए रिकार्ड को सुरक्षित रखा जाएगा, जिसके आधार पर मृतकों की शिनाख्त हो सकेगी। ऋषिगंगा में आए बर्फीले तूफान के बाद मंगलवार शाम तक यहां 32 शव मलबे से निकाले जा चुके हैं। इनमें से अभी तक 25 शवों की शिनाख्त हो सकी है। 7 शव अभी भी अज्ञात हैं।

(भाषा इनपुट के साथ)