PM के मनाने से मान जाएंगे किसान? टिकैत बोले- भरोसे से नहीं, कानून से चलता है देश

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नई दिल्ली
क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों से आंदोलन समाप्त करने की अपील का असर होगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल मिलना मुश्किल है, पर इतना जरूर है कि जल्द बातचीत शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने सोमवार को सरकार से कहा कि वार्ता के अगले दौर की तारीख तय करें।

टिकैत बोले- भरोसे पर नहीं, कानून से चलता है देश
उधर, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज कहा है कि MSP है, था और रहेगा लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाया जाएगा… देश भरोसा पर नहीं चलता। यह संविधान और कानून पर चलता है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को संसद में कहा, ‘हम आंदोलन से जुड़े लोगों से लगातार प्रार्थना करते हैं कि आंदोलन करना आपका हक है, लेकिन बुजुर्ग भी वहां बैठे हैं। उनको ले जाइए, आंदोलन खत्म करिए। आगे मिल बैठकर चर्चा करेंगे, सारे रास्ते खुले हैं। यह सब हमने कहा है और आज भी मैं इस सदन के माध्यम से निमंत्रण देता हूं।’

आंदोलनजीवी कहने पर किसानों को आपत्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आंदोलन समाप्त करने की अपील करने और बातचीत के लिए निमंत्रण देने के बाद किसान संगठनों के इस रवैये को सकारात्मक माना जा रहा है। उधर, किसान संगठनों ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर आपत्ति भी जताई है कि देश में आंदोलनकारियों की नई ‘नस्ल’ उभरी है जिसे ‘आंदोलनजीवी’ कहा जाता है।

हमने बातचीत से कभी इनकार नहीं किया…
किसान संगठनों ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका है। संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य किसान नेता शिव कुमार काका ने कहा कि वह अगले दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं और सरकार को बैठक की तारीख और समय बताना चाहिए। काका ने कहा, ‘हमने सरकार से वार्ता से कभी इनकार नहीं किया। जब भी सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया, हमने केंद्रीय मंत्रियों से बातचीत की। हम उनसे (सरकार) वार्ता के लिए तैयार हैं।’

11 दौर की हो चुकी है बातचीत
विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन गतिरोध बना हुआ है क्योंकि किसान संगठन तीनों कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने पर अडिग हैं। पिछले दौर की वार्ता में सरकार ने कानूनों को 12 से 18 महीने तक निलंबित रखने की पेशकश की थी लेकिन किसान संगठनों ने इसे खारिज कर दिया।

राज्यसभा में राष्ट्रपति के संबोधन पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को आश्वासन दिया कि मंडियों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। PM ने कहा, ‘इतना ही नहीं एमएसपी जारी है और जारी रहेगा।’ मोदी ने किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए कहा, ‘उन्हें (आंदोलनकारियों को) आंदोलन वापस लेना चाहिए और हम मिल बैठकर समाधान निकालेंगे और वार्ता के दरवाजे खुले हुए हैं। इस सदन से मैं उन्हें वार्ता के लिए फिर आमंत्रित करता हूं।’

किसान नेता और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सरकार पहले भी ‘सैकड़ों बार’ कह चुकी है कि एमएसपी जारी है और जारी रहेगा। कोहाड़ ने कहा, ‘अगर सरकार दावा करती है कि एमएसपी जारी रहेगा तो फिर वह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी क्यों नहीं दे रही है।’ उन्होंने कहा कि किसान संगठन वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन औपचारिक निमंत्रण मिलना चाहिए। किसान नेता ने कहा, ‘किसी भी मुद्दे का समाधान उचित वार्ता से किया जा सकता है। हम वार्ता बहाल करने के लिए सिद्धांत तौर पर तैयार हैं।’

(भाषा, ANI से इनपुट के साथ)