नेवी के लिए बन रहा डबल इंजन एयरक्राफ्ट, मिग-29K की जगह लेगा

0
16

नई दिल्ली
की जरूरत के मुताबिक डबल इंजन का कॉम्बेट एयरक्राफ्ट तैयार करने के लिए एरोनॉटिकल डिवेपलमेंट एजेंसी काम कर रही है। रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली यह एजेंसी 5 साल के भीतर इस एयरक्राफ्ट का पहला प्रोटोटाइप जारी कर देगी। इन एयरक्राफ्ट से इंडियन नेवी को रिप्लेस कर सकेगी। नेवी हेडक्वॉर्टर ने से यह भी जानकारी ली है कि क्या वह नेवी के लिए अनमैन्ड कॉम्बेट एयरक्राफ्ट डिवेलप कर सकते हैं।

एरोनॉटिकल डिवेलपमेंट एजेंसी में एलसीए नेवी मार्क-1 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. थंगवेल ने बताया कि एलसीए (लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) नेवी की सफल टेस्टिंग हो गई है और पिछले साल इसे आईएनएस विक्रमादित्य में लैंड भी कराया गया। उन्होंने कहा कि इंडियन नेवी की जरूरत ट्विन इंजन (दो इंजन वाला) एयरक्राफ्ट की है। नेवी अडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट चाहती है। हम पिछले छह महीने से इस पर काम कर रहे हैं। यह मीडियम वेट का होगा।

थंगवेल ने कहा कि यह बड़ा एयरक्राफ्ट होगा इसलिए इसमें विंग फोल्डिंग कपैसिटी होगी ताकि मैंटेनेंस या स्टोरेज के लिए हैंगर में ले जाया जा सके। इसका डिजाइन इस तरह होगा कि यह आईएनएस विक्रमादित्य और स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट कर सकेगा। इसके विंग्स बिना फोल्ड के 11.2 मीटर के होंगे और फोल्ड होने पर 7.6 मीटर के होंगे।

उन्होंने बताया कि 4-5 साल में इसका पहला प्रोटोटाइप रिलीज कर दिया जाएगा। इंडियन नेवी इससे अपने मिग-29K को रिप्लेस कर सकेगी। इंडियन नेवी भी इस डिवेलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है। नेवी इसमें फंडिंग भी कर रही है साथ ही उनके एक्सपर्ट भी डिजाइन स्टेज में मिलकर काम करेंगे। एलसीए नेवी मार्क-1 को इंडियन नेवी मिग-29 पायलट की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल कर रही है।

पी. थंगवेल ने आगे कहा, ‘एलसीए नेवी मार्क-1 को लेकर यूएस नेवी ने भी रुचि दिखाई है। वह अपने पायलटों की ट्रेनिंग के लिए इनका इस्तेमाल करना चाहती है। यूएस नेवी को 43 ट्रेनर एयरक्राफ्ट चाहिए। हमने इसका आरएफआई भेजा है। करीब तीन महीने पहले हमें नेवी हेडक्वॉर्टर से कम्युनिकेशन मिला कि क्या मार्क-1 एयरक्राफ्ट को अनमैन्ड एरियल कॉम्बेट वीइकल के तौर पर कंवर्ट कर सकते हैं?’

उन्होंने कहा कि इसके लिए कुछ टेक्नॉलजी चाहिए। मार्क-1 हाई स्पीड लैंडिग कर सकता है तो ऐसा हम यूएवी (अनमैन्ड एरियल वीइकल) में भी तैयार कर सकते हैं। हैंड फ्री टेकऑफ हम आराम से कर सकते हैं। अनमैन्ड के लिए ऑटोनोमस लैंडिंग की जरूरत है इसमें हमने कई अहम पड़ाव हासिल किए हैं। हमारे पास क्षमता है और हम इसे अचीव कर लेंगे। उन्होंने कहा कि ऑटोमेटिक टेक ऑफ एंड लैंडिग की बेसिक रिक्वायरमेंट आ रही है। एक बार हम इसमें एक्सपर्ट हो जाएंगे तो फिर बाकी सारी चीजें हैंडल हो जाएंगी। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं।