किसान आंदोलनः विरोधियों ने अब मोदी सरकार के खिलाफ ‘वाजपेयी’ को उतारा

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नई दिल्ली
तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के बीच सरकार विपक्षी दलों पर ‘मासूम’ किसानों को भड़काने, बरगलाने का आरोप लगा रही है। यहां तक कि किसान आंदोलन के समर्थन और विरोध में सोशल मीडिया पर हैशटैग वॉर छिड़ी हुई है। पक्ष-विपक्ष में एक से बढ़कर एक दलीलें दी जा रही हैं। इन सबके बीच विरोधियों ने मोदी सरकार के खिलाफ ‘अटल’ वार किया है। किसान आंदोलन पर विरोधियों ने अब मोदी सरकार के खिलाफ दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी को उतार दिया है।

पूरा मामला यह है कि विरोधियों ने अटल बिहारी वाजपेयी के पुराने भाषण की क्लिप शेयर की है जिसमें वह किसानों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए तत्कालीन सरकार को चेता रहे हैं कि वह किसान आंदोलन का दमन न करे। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर ऐडवोकेट प्रशांत भूषण ने गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी के पुराने भाषण का अंश साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘भाजपा के भक्त अटल बिहारी वाजपेई का 1980 का भाषण किसानों और उनके ऊपर सरकार के अत्याचार के बारे में सुन लें!’

वीडियो में वाजपेयी एमएसपी को लेकर तत्कालीन सरकार पर तीखे हमले करते दिख रहे हैं। वह आरोप लगा रहे हैं कि सरकार दाम तो तय कर देती है लेकिन खरीदने का इंतजाम नहीं करती। वाजपेयी वीडियो में कहते दिख रहे हैं, ‘राजनीति केवल कुर्सी का खेल नहीं रहना चाहिए, लेकिन कुछ वर्षों से कपास की खेती करने वाले किसान परेशान हैं मगर कपड़े की कीमत तीन गुना बढ़ी है। जूट का दाम तो सरकार ने ऐसा तय किया है, जो जूट के पैदावार की लागत से भी कम है। ये सरकार दाम तय करती है मगर खरीदने का इंतजाम नहीं करती। छोटे किसान को जल्दी बेचना पड़ता है, वह घर में रख नहीं सकता। औने-पौने मूल्य पर बेचता है, शोषण का शिकार होता है। इसलिए किसान बिगड़ रहे हैं।’

वह आगे कहते हैं, ‘केवल महाराष्ट्र में नहीं कर्नाटक में, आंध्र प्रदेश में, मध्य प्रदेश में, गुजरात में…किसान न्याय पाने के लिए लड़ रहे हैं। मैं किसान को चेतावनी देना चाहता हूं कि दमन के तरीके छोड़ दीजिए। डराने की कोशिश मत करिए। किसान डरने वाला नहीं है। हम किसानों के आंदोलन का दलीय राजनीति के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहते लेकिन हम किसानों की उचित मांग का समर्थन करते हैं और अगर सरकार दमन करेगी, कानून का दुरुपयोग करेगी, शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश करेगी तो किसानों के संघर्ष में हम कूदने से संकोच नहीं करेंगे, उनके साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलेंगे।’